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Deoria News: पीआईसीयू फुल... एक बेड पर दो बच्चों का इलाज

Thu, 19 Dec 2024 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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- ठंड का बच्चों की सेहत पर पड़ रहा असर, मरीज बढ़े
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देवरिया। ठंड का असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। बुखार, सांस से पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इस बीमारी से पीड़ित हर रोज 40 से 50 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें गंभीर पांच से सात मरीजों को भर्ती कराया जा रहा है। सामान्य मरीज को डॉक्टर दवा और सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। ठीक होने में दस से पंद्रह दिन का समय लग जा रहा है, जबकि पीआईसीयू फुल हो गया है।
ठंड बढ़ गई है। इस मौसम में वायरस व बैक्टीरिया का संक्रमण बढ़ जाता है। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ रही है। रोग प्रतिरोध क्षमता कम होने की वजह से बच्चे संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और स्वास्थ्य बिगड़ जा रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में बुखार, सर्दी, जुकाम, सांस से पीड़ित बच्चों को लेकर परिजन पहुंच रहे हैं। इसमें निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हर रोज करीब 40 से 50 मरीज आ रहे हैं।
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बृहस्पतिवार को बाल रोग विभाग में मरीजों की भीड़ थी। डॉ. इकबाल ने 170 से अधिक बच्चों का इलाज किया। इसमें सर्दी, खांसी, सांस लेने में दिक्कत के मरीज शामिल रहे। अधिकांश मरीजों को दवा के साथ बचाव का सुझाव दिया गया। उधर पीआईसीयू के 15 बेड पर क्षमता से अधिक मरीज भर्ती थे। यहां 18 बच्चे भर्ती थे, एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज चल रहा था। इसमें बुखार, सांस के मरीज अधिक थे। बीस बेड के चिल्ड्रेन वार्ड में 23 मरीज भर्ती किए गए थे। इसमें बुखार,सांस, उल्टी-दस्त, पेट दर्द से पीड़ित मरीज थे।
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बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. इकबाल ने बताया कि ठंड के मौसम में वायरस और बैक्टीरिया ग्रोथ करते हैं। इम्युनिटी कम होने से बच्चे संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। बुखार, सांस, खांसी, सर्दी से पीड़ित होते हैं। लापरवाही बरतने पर फेफड़े का संक्रमण होने की संभावना हो जाती है, जिससे निमोनिया हो सकता है। ठंड में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कोई दिक्कत हाेने पर बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाएं और उनकी सलाह पर इलाज कराएं।

यह बरतें सावधानी
- सुबह व शाम की ठंड से बचाएं।
- गर्म कपड़े, टोपी, मोजा पहनाएं।
- ठंड पेय पदार्थों का सेवन न करने दें।
- ठंडा पानी, दही का सेवन न करने दें।
- ताजा, पौष्टिक व सुपाच्य भोजन का सेवन कराएं
- मौसमी फल व हरी साग-सब्जी का सेवन कराएं।
- छह माह तक बच्चों को मां का दूध पिलाएं।
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