सांस, सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया से पीड़ित बच्चे पहुंच रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मौसम में परिवर्तन का असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। सांस, सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, निमोनिया से पीड़ित हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में इन दिनों मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। पीआईसीयू फुल हो गई है। डॉक्टर दवा के साथ बचाव और सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मौसम बदलने से वायरस का संक्रमण बढ़ गया है। इम्युनिटी कम होने के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मंगलवार को दोपहर बाद 1:35 बजे तक करीब 125 बच्चों को लेकर तीमारदार इलाज कराने पहुंचे थे। डॉ. एचके मिश्रा ने इलाज किया। इसमें सांस, सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित सबसे अधिक 70 मरीज रहे। जबकि उल्टी, पेट दर्द के 20 मरीज थे। निमोनिया के तीन मरीजों पहुंचे थे। इसमें दो की हालत गंभीर देखकर भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। अधिकांश मरीजों को दवा के साथ बचाव की सलाह दी गई। वहीं, 15 बेड की पीआईसीयू फुल हो गई है।
मंगलवार को सुबह 18 मरीज भर्ती थे। कुछ बेड पर दो मरीजों को रखा गया था। इसमें सांस के छह, निमोनिया से पीड़ित तीन, बुखार, झटका के सात व खून की कमी के दो मरीजों का उपचार हो रहा था।
डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरस सक्रिय हो जाते हैं। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। वायरस सांस की नली से अंदर चले जाते हैं। इससे इंफेक्शन फैल जाता है। बच्चों को बुखार, खांसी के साथ बुखार और सांस की परेशानी हो जाती है। सामान्य मरीजों को दवा दी जा रही है। गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इस समय बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है।
ये बरतें सावधानी
बच्चों को ठंड से बचाएं, पूरा कपड़ा पहनाएं
गर्म पेय पदार्थ का सेवन करें
बच्चों को अनावश्यक बाहर न निकलने दें
बच्चों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नहीं जाने दें
मौसमी फल व हरी साग-सब्जी का सेवन करें
छह माह तक बच्चों को मां का दूध पिलाएं
साफ-सफाई पर रखें, हाथ की सफाई करें
कोट
मौसम में परिवर्तन से बच्चे बीमार हो रहे हैं। अस्पताल में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ गई है। इस मौसम में बच्चों को लेकर सावधानी जरूरी है। तबीयत बिगड़ने पर लापरवाही न करें। विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं और दवा दें। अस्पताल में इलाज व दवा की सुविधा है।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस