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Deoria News: उमस भरी गर्मी से लोग परेशान, हवा की गति थमने से हालत हुई खराब

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मानसून के दगा देने के बाद पंपिंग सेट से पानी चलाकर धान की रोपनी करता किसान। संवाद
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- मानसून आने के बाद भी चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी का करना पड़ रहा सामना
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- हवा की गति थमने के बाद भी नहीं हो रहा ठंडक का अहसास
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले वासियों को मानसून में चिलचिलाती व उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हवा की गति थमने से स्थिति और खराब हो गई है। मानसून में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक है। इसके साथ ही वातावरण में उमस का स्तर 87 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है। इसके कारण सुबह के पांच बजे भी लोगों के शरीर से पसीने का गिरना जारी है। जो दिन भर लोगों को बेहाल कर रहा है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार एक से दो दिन में जिले में तेज बारिश की संभावना है।
इन दिनों मानसून भी गर्मी व उमस से गुजर रहा है। हवा की गति मंद होने से तापमान में ठंडक का अहसास नहीं हो रहा। एक दिन की बारिश ने कुछ राहत दी थी, लेकिन बारिश थमने के कारण मौसम के मिजाज में उच्च तापमान का स्तर जारी है। वातावरण में उमस का स्तर बढ़ कर 87 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच चुका है। इसके साथ ही गर्मी की तरह तापमान 34 डिग्री तक पहुंच चुका है।
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वहीं न्यूनतम तापमान 27 डिग्री पर रहा। कुछ दिनों से बारिश के रुकने के कारण विपरीत परिस्थितियों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने बारिश का अनुमान जाहिर किया है। इसके लगभग दो दिनों तक भारी बारिश में तब्दील होने की संभावना है। इसके साथ ही शाम के वक्त चलने वाली हवाओं का दौर भी थम गया है, जिससे मिलने वाली राहत को लोग तरसने लगे हैं। आलम यह है कि रात के वक्त भी लोगों को भीषण गर्मी का अहसास हो रहा है।
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गर्मी से पड़ रहा सेहत पर असर
देवरिया। उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हैं। इसका असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार से पीड़ित होकर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें बच्चे भी शामिल हैं। डॉक्टर दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
उमस भरी गर्मी में खानपान में गड़बड़ी की वजह से लोग बीमार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में शनिवार को 350 से अधिक मरीज पहुंचे थे। इसमें पेट दर्द के करीब 80, बुखार के 40, उल्टी-दस्त के 15 लोगों का इलाज किया गया। इसमें दो की हालत गंभीर देख उन्हें भर्ती किया गया, जबकि इमरजेंसी में उल्टी-दस्त, बुखार और पेट दर्द से पीड़ित 35 लोगों का इलाज किया गया। बाल रोग विभाग में बीमार बच्चों को लेकर तीमारदार पहुंचे थे। करीब 102 मरीजों का इलाज किया गया। इसमें बुखार, पेट दर्द के अधिक मरीज रहे। पीआईसीयू और चिल्ड्रन वार्ड में 32 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें बुखार के 14, उल्टी-दस्त के 13, पेटदर्द के एक व सांस से पीड़ित तीन मरीज हैं। डॉक्टर दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। संवाद

मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ाई
देवरिया। मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में अच्छी बारिश नहीं होने से कई ब्लाकों के किसान अब तक धान की नर्सरी तैयार नहीं कर पाए हैं। हालांकि उसका उचित समय निकलता जा रहा है, जिससे किसान चिंतित हैं, क्योंकि अगर समय से जिले में धान की रोपाई नहीं हो पाती है तो धान के फसल पर इसका असर पड़ेगा। इससे अच्छी पैदावार नहीं हो पाएगी, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ सकता है। संवाद

अभी उमस वाली गर्मी से नहीं मिलेगी राहत
देवरिया। जिले में हल्की बारिश होने से लू से तो निजात जिले वासियों को मिली, लेकिन मानसून ने मुंह मोड़ लिया, जिससे उमसभरी गर्मी से लोग परेशान हैं। वहीं बारिश नहीं होने से धान की रोपाई का भी कार्य प्रभावित हो रहा है। जिले के नदी व नहर इलाके के कुछ किसानों ने नर्सरी तैयार की है। वहीं कुछ किसान मोटर पंप के सहारे नर्सरी डाली गई है। जिसे बचाने के लिए किसानों को दिन-रात मोटर पंप चलाना पड़ रहा है। किसानों के सामने उसे बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। अगर दो-तीन दिनों में बारिश नहीं हुई तो जो नर्सरी तैयार की गई है, उसे बचाना भी मुश्किल होगा। संवाद

भरपूर मानसून न आने से डीजल के सहारे धान की रोपाई
देवरिया। जून में भी मानसून मेहरबान नहीं हुआ है, लेकिन धान रोपाई का काम जोरशोर से चल रहा है। खेत में नमी न होने के कारण डीजल के सहारे पानी चलाने में किसानों के पसीने छूट रहे हैं। महंगा डीजल खेती का खर्च बढ़ा रहा है, जिससे मुनाफे का आंकड़ा खिसक सकता है।
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धान की फसल पूरी तरह पानी पर निर्भर है। गत वर्ष मानसून मेहरबान रहा, लेकिन इस बार प्री-मानसूनी फुहारों के पड़ने के बाद सूरज की किरणें तेजी से नमी सोख रही हैं। किसान पंपिंग सेट के सहारे ही रोपाई कार्य पूर्ण कर रहे हैं, जिसमें सिंचाई का खर्चा 200 रुपये प्रति घंटा लग रहा है। एक बीघा रोपाई योग्य खेत तैयार करने में लगभग एक हजार से 1200 रुपये का खर्च पड़ रहा है, क्योंकि डीजल का रेट लगभग 91 रुपये लीटर है। अगर शीघ्र मानसून मेहरबान नहीं हुआ तो रोपाई बचाने के लिए भी लगातार सिंचाई की जरूरत होगी और खेती की लागत का बढ़ना लगभग तय है। संवाद
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