देवरिया। शहर के रामगुलाम टोला निवासी प्रीति वर्मा के सजावटी सामान लोगों को खूब भा रहे हैं। प्रीति के बनाए अनेक उत्पाद गोरखपुर चिड़ियाघर घूमने वालों की पहली पसंद बन गए हैं। प्रीति अब महिलाओं के लिए नजीर बन गई हैं।
प्रीति वर्मा को कपड़े, रुई, धागे आदि के प्रयोग से नई-नई डिजाइन के सजावटी सामान बनाने का शुरू से शौक रहा है। वह कभी गुड़िया तो कभी झालर-झूमर बनाकर अपने घर के दरवाजों पर लगाती थीं। अपने रिश्तेदारों को भी उपहार स्वरूप देती रहती थीं। इस बीच प्रदेश सरकार ने सजावटी सामान को एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत जिले का उत्पाद घोषित कर दिया। इससे उत्साहित प्रीति ने उद्योग विभाग से संपर्क कर अपना पंजीकरण करा लिया। वह 15 महिलाओं का मां काली स्वयं समूह बनाकर कार्य करने लगीं। इसके तहत प्रीति ने पांच लाख रुपये का ऋण लिया और व्यवसाय को आगे बढ़ा लिया। इधर, प्रीति के बनाए उत्पाद लोगों को भाने लगे। वह उद्योग विभाग की ओर से विभिन्न प्रदर्शनी में अपने उत्पाद को प्रदर्शित करने लगीं। उनकी लगन व उत्पादों की गुणवत्ता को देखते हुए प्रीति को शहीद अशफाकउल्लाह खां चिड़ियाघर में एक स्टॉल मिल गया, जहां से उनको एक नई राह मिल गई। प्रीति प्रतिदिन देवरिया से गोरखपुर ट्रेन से जाती हैं, दिनभर वहां स्टॉल लगाने के बाद शाम को ट्रेन से वापस चली आती हैं।
सौ से अधिक प्रकार की चीजें करती हैं तैयार
प्रीति करीब सौ से अधिक प्रकार की उत्पाद तैयार करती हैं। इसे वह आवश्यकतानुसार माइक्रोन धागे, मोती आदि की सहायता से तैयार करती हैं। वह झालर, झूमर, टेडीबियर, गुलदस्ता, मोबाइल स्टैंड, गमला स्टैंड, बंदनवार, दीवार पर लगाने वाले फोटो फ्रेम समेत करीब सौ से अधिक प्रकार के उत्पाद तैयार करती हैं।
15 महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ा
प्रीति की अगुवाई में 15 महिलाओं की आजीविका सजावटी सामान की बिक्री से चलती है। इन महिलाओं को प्रीति ने प्रशिक्षित किया है। यह महिलाएं सुबह प्रीति के घर से सजावटी सामान तैयार करने के लिए जरूरी मटेरियल ले जाती हैं और एक-दो दिन में सामान तैयार कर वापस दे जाती हैं। इनको प्रति सामान के हिसाब से मेहनताना मिल जाता है। इससे यह महिलाएं घर के कामकाज के साथ अच्छी आय अर्जित कर लेती हैं।