- खेल मैदान में अभ्यास कर सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों में चयनित हो चुके हैं 50 से अधिक युवा
तरकुलवा। ग्रामीण युवाओं की मेहनत, लगन और संकल्प का एक प्रेरणादायक उदाहरण कुलकुला जंगल के पास देखने को मिल रहा है। जहां खाली प्लॉट था, वहां युवाओं के प्रयास से एक दौड़ने का ट्रैक तैयार हो चुका है। इस ट्रैक ने न केवल गांव के युवाओं को बेहतर अभ्यास का अवसर दिया है, बल्कि उनके सपनों को भी नई उड़ान दी है।
देवरिया-कुशीनगर जिलों के संधि स्थल पर स्थित कुलकुला माता का मंदिर है। मंदिर के चारों तरफ घना जंगल है, जो चारों ओर से बरसाती नालों खनुआ, सोनरा और घाघी से घिरा है। जंगल के किनारे तरकुलवा ब्लॉक के अंतिम छोर पर सिसवा-मुड़ीकटवा गांव स्थित है। इसी गांव से कुछ दूर स्थित है एक खाली प्लॉट है, जो कुड़वा एस्टेट की सीलिंग में निकली हुई जमीन है। कभी झाड़-झंखाड़ और वीरानी थी, वहां आज युवाओं के सपनों की रफ्तार दौड़ती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ साल पहले तक युवाओं को दौड़ और शारीरिक अभ्यास के लिए कोई स्थान नहीं था। आर्थिक अभाव और संसाधनों की कमी के कारण कई प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती थी लेकिन, युवाओं ने हार नहीं मानी। उन्होंने मिलकर मैदान को समतल किया, दौड़ाने योग्य ट्रैक तैयार किया और नियमित अभ्यास शुरू किया। धीरे-धीरे यह ट्रैक केवल खेल का मैदान नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों, संघर्षों और सफलता का प्रतीक बन चुका है।
इस मैदान पर हर रोज सुबह-शाम सिसवा, सरैनी, मुड़ीकटवा, नरहरपट्टी, नारायणपुर, खरहरिया, हरैया, अमवा, कनकपुरा, जलुआ, सोहानरिया, मठिया महावल, भरौटा, सीतापट्टी, कौलाचक, बंजरिया आदि गांवों के सैकड़ों की तादात में युवा इकट्ठा होते हैं। सभी मिल जुलकर सेना, पीएससी, यूपीपी, पैरा मिलिट्री आदि में भर्ती की तैयारी करते हैं। इसी मैदान से निकले सिसवा-मुड़ीकटवा गांव के रहने वाले कामोद कुशवाहा इन दिनों यूपीपी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कामोद बताते हैं कि इस मैदान में प्रैक्टिस करने वाले लगभग 50 से अधिक युवा सेना, पुलिस, पीएससी और सुरक्षा बलों में चयनित हो चुके हैं। अमवा गांव के दुर्गेश तिवारी, सिसवा-मुड़ीकटवा के शैलेश गौतम, विकास प्रसाद, परशुराम कुशवाहा, वीरेंद्र गौतम आदि बताते हैं कि यदि मन के कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हर संकल्प पूरा होता है। युवाओं के जुनून ने आज इस खाली प्लॉट को भर्ती की तैयारी का प्रमुख केंद्र बना दिया है। आज कुलकुला जंगल के पास का यह खाली प्लॉट केवल एक मैदान नहीं है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के सपनों की पाठशाला है। जहां से निकलकर हर साल दर्जनों युवा देश की वर्दी तक पहुंचते हैं।