रुद्रपुर। एकौना क्षेत्र में गोर्रा और राप्ती नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटान शुरू हो गया है। इससे बांधों पर दबाव बढ़ने लगा। तिघरा मराछी बांध पर जगह-जगह कटान के कारण बंधे की मिट्टी टूटकर राप्ती नदी में गिर रही है।
करीब 13 किमी लंबे बांध पर रेनकट्स नहीं भरे जाने से आवाजाही के दौरान खतरा बना है। पिड़रा पुल के एप्रोच पर गोर्रा का कटान भी तेजी से हो रहा। इससे आवागमन बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
राप्ती 67.80 मीटर और गोर्रा 68.50 मीटर पर बह रही थी। दोनों नदियों के जलस्तर में 24 घंटे के भीतर पांच-पांच सेमी उतार आया। इसके बाद राप्ती के जलस्तर में फिर पांच सेमी की बढ़त हुई।
तिघरा मराछी बांध पर राप्ती नदी तिघरा और करहकोल गांव के बीच रिटायर बंधे को काटकर खेती योग्य जमीन की तरफ बढ़ रही है। यहां करीब 30 बीघा तक जमीन नदी में समा चुकी है।
बंधे पर रेनकट्स से राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया है। भेड़ी और मराछी टोला के पास बोल्डर पिचिंग दरकने लगा है। नगवा छपरा बांध पर साही की मांद बनने से बंधा धंस रहा है। भिरवा, सचौली पटवनिया गांव के पास बंधे की हालत दयनीय देख ग्रामीणों में जलस्तर बढ़ने पर बांध धंसने का भय बना है।
गोर्रा नदी के पिड़रा भुसवल बांध पर पिड़री गांव के पास, पिड़रा करनपुरा बांध पर सिलहटा, करौता, जोगिया सरमोहना बांध पर शीतल माझा, पांडेय माझा, माझा भीमसेन गांव के पास और पचलड़ी बेलवा बांध पर जगह-जगह रेन कट्स और रैट होल से बांधों की हालत चिंताजनक बनी है।
जलस्तर गिरने के बाद कटान तेज होने से जर्जर बांध से कछार और दोआबा के हालात बिगड़ जाएंगे। राप्ती सेमरौना नकईल बांध, नगवा छपरा, तिघरा मराक्षी बांध सहित जमीदारी बांध पर बने होल बारिश में मुंह बाए खड़े है। कछार और दोआबा के 116 गांवों के लोगों ने जलस्तर गिरने पर कटान रोकने की मांग की। अवर अभियंता हिमांशु कुमार ने कहा कि कटान स्थलों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।