देवरिया में सोमवार को भगवान परशुराम की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। उन्हें भगवान विष्णु का छठां अवतार माना जाता है। भगवान परशुराम ने हमेशा अत्याचार और अन्याय का विरोध किया था। उन्होंने आताताइयों का नाश किया था।
विद्याधर्म संजीवन संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि रामनारायणाचार्य ने कहा कि भगवान परशुराम के आदेश के अनुरूप हमें अपने बच्चों को शिक्षा और संस्कार देने की जरूरत है। तभी उनकी जयंती मनाने का मायने निकलेगा। आद्या प्रसाद शुक्ल ने कहा कि भगवान परशुराम ने पद, धन को छोड़ने की बात कहा है। उन्होंने अनुशासन का पाठ सिखाया है।
इस अवसर पर डॉ. विपीन बिहारी शुक्ल, सदानंद दुबे, दिवाकर तिवारी, देवंद्र मणि, कौशल कुमार, रमाकांत दुबे, योगेंद्र तिवारी, सतीशचंद्र पांडेय, कामेश्वर पांडेय, भुवनेश्वर मिश्र आदि मौजूद रहे। कसया रोड स्थित भूमिहार ब्राह्मण समाज सेवा संस्थान की ओर से भगवान परशुराम की जयंती समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि गायत्री पीठ के संरक्षक स्वामीनाथ राय ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवनवृत्त पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विचार संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में शिवशंकर राय, दिलीप कुमार, संजय राय, वीरेंद्र राय, बलराम राय, अशोक राय, कमलेश, अवनीश शंकर आदि मौजूद रहे। वहीं टाउनहाल में राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा की ओर से परशुराम जयंती मनाई गई। इस मौके पर लोगों ने परशुराम भगवान के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। जिसमें बसपा प्रभारी/ प्रत्याशी अभयनाथ त्रिपाठी, डॉ मकसूदन मिश्र, राकेश शुक्ला, नित्यानंद पांडेय, सोनू तिवारी, संजीत नाथ त्रिपाठी, बैजनाथ पति त्रिपाठी समेत कई लोग मौजूद रहे।