जितनी लागत उतने में भी नहीं बिक रहा धान
देवरिया। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस समय धान बेचने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। धान में जितनी लागत लगी है, किसानों को उतना भी मूल्य धान बेचने में नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उनकी आय दोगुनी कैसे होगी।
प्रकृति की मार झेल चुके किसानों की जेब काटने में क्रय केंद्र संचालक भी जुटे हुए हैं। किसानों की धान को मानक विहीन बताकर लौटा दिया जा रहा है। उसी धान की खरीदारी आढ़तियों के माध्यम से की जा रही है। क्रय केंद्रों की बेरुखी से परेशान किसान अपने धान औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
सरकार ने किसानों से धान खरीद के लिए 1868 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। इसके लिए जिले में 88 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इनमें 83 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद चालू है, लेकिन ज्यादातर किसानों के धान मानक विहीन बताकर लौटा दिए जा रहे हैं। जिनके धान खरीदे जा रहे हैं, उसमें भारी कटौती की जा रही है। क्रय केंद्रों के झमेले से बचने के लिए किसान धान आढ़तियों के हाथों एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल में बेच रहे हैं। वही क्रय केंद्र व्यापारियों से धान खरीद रहे हैं।
यह है धान खरीद का मानक
क्रय केंद्रों पर खरीद किए जा रहे धान में 67 प्रतिशत चावल का उत्पादन होना अनिवार्य है। जांच के लिए क्रय केंद्रों की ओर से पांच मानक निर्धारित किए गए हैं। जिसमें अकार्बनिक व कार्बनिक पदार्थ एक प्रतिशत, क्षतिग्रस्त, बदरंग, अंकुरित एवं घुने हुए दाने अधिकतम पांच प्रतिशत, अपरिपक्व, संकुचित एवं सिकुड़े हुए दाने तीन प्रतिशत, अधोमानक प्रजाति का अपमिश्रण छह प्रतिशत और नमी अधिकतम 17 प्रतिशत होना चाहिए।
अतिवृष्टि और हल्दिया रोग से हुआ है नुकसान
लाभ की उम्मीद में धान की बुआई कर चुके किसानों पर शुरुआत से ही कुदरत की मार पड़ने लगी। रोपाई के चंद दिनों बाद शुरू हुई अतिवृष्टि से ज्यादातर इलाकों में फसल खराब हो गई। बाकी बची फसल में हल्दिया रोग लगने से पैदावार में काफी गिरावट आई है। गुद्दीजोर के सुनील यादव, सिरिसियां पांडेय निवासी जितेंद्र दुबे, पांडेयपुर के श्यामानाथ त्रिपाठी, बरूआडीह के संजय पांडेय आदि किसानों के अनुसार इस साल प्रति एकड़ 12 से 15 क्विंटल धान की पैदावार हो पाई है।
प्रति एकड़ धान की लागत
कार्य - लागत (रुपये में)
बीज (हाईब्रिड) - 1500
नर्सरी की तैयारी - 1500
खेत की जुताई (सूखा) - 1200
जुताई (लेव) - 3000
लेव में खाद - 2500
लेव में पानी - 1500
धान की रोपाई - 3000
जिंक, यूरिया( दो बार)- 700
खरपतवार नियंत्रण - 6000
धान की कटाई - 1500
धान की ढुलाई - 500
कुल - 22900
किसानों को चाहिए कि वह अपना धान क्रय केंद्र पर लाने से पहले उसे अच्छी तरह से सुखा लें। उसमें लकड़ी, धूल, सिकुड़े हुए दानों को घर से अलग करके लाएं। क्रय केंद्रों पर वही धान खरीदे जाएंगे, जिसमें 67 प्रतिशत चावल निकल सके। गुणवत्ता अच्छी होने के बावजूद अगर कोई केंद्र प्रभारी धान की खरीद में हीलाहवाली करता है तो उसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 18001800150 पर या संबंधित विभाग के अधिकारियों से करें।
- जितेंद्र यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।