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सपा में टिकट के लिए इंट्री मारने की जुगाड़ में बाहरी

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सपा में टिकट के लिए इंट्री मारने की जुगाड़ में बाहरी
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देवरिया। विधानसभा उपचुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। बसपा ने अपना प्रत्याशी जहां घोषित कर ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाया है। वहीं सपा जिताऊ प्रत्याशी की तलाश में जुट गई है। सपा ब्राह्मण एवं वैश्य में से किसी एक को टिकट देने का विचार बना सकती हैं। ऐसे में कुछ बाहरी चेहरे सपा में टिकट के लिए इंट्री मारने की जुगाड़ में लग गए हैं। इसको लेकर सपा कार्यकर्त्ताओं में खलबली मच गई है।
देवरिया विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी के रूप में वर्ष 2007 में दीनानाथ कुशवाहा ने तकरीबन 25 हजार मत पाकर परचम लहराया था। जबकि इसके पूर्व वर्ष 2002 के चुनाव में जब वह नेलोपा से चुनाव जीते तो उन्हें 35 हजार और तत्कालीन सपा प्रत्याशी रामनगीना यादव को 33 हजार से अधिक प्राप्त हुए थे।
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नए परिसीमन के बाद हुए वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जन्मेजय सिंह 56 हजार से अधिक मत पाकर चुनाव जीत गए। बसपा के प्रमोद सिंह दूसरे स्थान पर रहे, उन्हें 33 हजार से ही संतोष करना पड़ा। सपा को कम वोट मिल था। 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में जन्मेजय सिंह ने फिर सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी जेपी जायसवाल को काफी मतों के अंतर से हराया। जन्मेजय सिंह की मौत के बाद हो रहे उपचुनाव में सपा अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए जीतने वाले उम्मीदवार पर दांव लगा सकती है। पिछले चुनाव में भी सपा में गुटबाजी उभरकर सामने आई थीं। इस बार भी उपचुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में गुटबाजी उभर कर सामने आ चुकी है।
सपा में गुटबाजी का ही नतीजा है कि बरहज रोड पर हाल ही में एक मैरेज हॉल में विधानसभा उपचुनाव में सपा से टिकट मांग रहे कई प्रत्याशियों सहित तकरीबन 100 कार्यकर्ता जुटे थे। इसमें वर्ष 2017 के चुनाव में अपना भाग्य आजमाने वाले पूर्व एमएलसी जेपी जायसवाल को उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाएं जाने की मांग की गई। ऐसे लोगों ने बगावत का बिगुल फूंकने का एलान तो कर दिया, लेकिन कुछ ही दिन बाद उनके दावों की हवा निकल गई। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी विरोधी नहीं था, फिर भी इसे इस तरीके से नेतृत्व के सामने पेश कर बगावत का नाम दे दिया गया।
पार्टी के उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व के पास एक पक्ष की बात जब पहुंची तो उन्होंने इसे गंभीरता से ले लिया और बैठक में शामिल टिकट के कुछ दावेदारों के नामों पर कोई विचार नहीं करने का गोपनीय फरमान जारी कर दिया। उपचुनाव के बाद ऐसे कुछ सपा नेताओं को बाहर का रास्ता पार्टी मुखिया दिखा सकती है। इसकी भनक मिलने एवं सपा के अंदरूनी लड़ाई की वजह से कुछ बाहरी सपा में इंट्री लेकर टिकट की जुगाड़ में जी जान से जुट गए हैं। इसमें कुछ भाजपा और बसपा से जुड़े चेहरे भी शामिल हैं। उपचुनाव को लेकर सपा ने विधानसभा क्षेत्र के 381 बूथों को 36 सेक्टर एवं सात जोन में बांटकर जोन प्रभारियों की तैनाती की है। जोन प्रभारी बूथ कमेटियों का सत्यापन कर निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को बाहर कर नए एवं उत्साही कार्यकर्त्ताओं को जोड़ेंगे।
इन पर कोई संगठन नहीं लगा सका लगाम
उपचुनाव में टिकट तो कई कार्यकर्ता मांग रहे हैं, लेकिन इसमें एक दावेदार ने तो अपनी गाड़ी पर अपना नाम बकायदे लिखवाकर प्रचार शुरू कर दिया है। इसका खराब असर पार्टी की छवि पर पड़ रहा है। ऐसे लोगों पर संगठन भी नकेल नहीं कस पा रहा है।
इन्होंने की दावेदारी, मांग रहे टिकट
समाजवादी पार्टी से टिकट मांगने वालों में पूर्व में चुनाव लड़ चुके पूर्व एमएलसी जेपी जायसवाल, समाजवादी साहू राठौर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव, एमएलसी रह चुके स्व. रामनगीना यादव के पुत्र पूर्व ब्लॉक प्रमुख विजय प्रताप यादव, तेज प्रताप जायसवाल, युवा नेता पंकज वर्मा, लंबे समय से सपा से जुड़े संगठन के उपाध्यक्ष ह्दयनारायण जायसवाल, जुझाऊ नेता व्यास यादव आदि के नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, एक पूर्व एमएलसी, और भाजपा में टिकट नहीं मिलने की आस छोड़ने वाले कुछ नेताओं के नाम की चर्चाएं हैं।
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उप चुनाव में टिकट के लिए सात से अधिक लोगों ने आवेदन किया है। टिकट का निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा। उपचुनाव जीतने के लिए संगठन बूथ स्तरीय कमेटियों का सत्यापन शुरू कर दिया गया है। विधानसभा को सात जोन में बांटा गया है।
डॉ. दिलीप यादव, सपा जिलाध्यक्ष
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