लार रोड। मईल थाना क्षेत्र में हुए वकील यादव और विनय यादव के दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश करने में जुटी पुलिस को कुछ अहम सुराग लगे हैं। आशंका के आधार पर पुलिस बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक कुछ मोबाइल नंबरों को ट्रेस करने में लगी है। बृहस्पतिवार को दोनों का ब्रह्मभोज है। माना जा रहा है कि पुलिस तब तक किसी ठोस नतीजे पर पहुंच जाएगी और सप्ताह के अंत में इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा हो सकता है।
इस हत्याकांड के खुलासा के लिए पुलिस की छह टीमें लगातार माथापच्ची कर रही हैं। घटना के 14 दिन बीत चुके हैं। इस दौरान मईल पुलिस और एसओजी की टीम ने दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने से लेकर करीब एक हजार मोबाइल नंबरों की गतिविधियों की जांच की है। 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस की जांच अब शुरुआती पड़ताल से आगे बढ़कर घटना की कड़ियों को आपस में जोड़ने और वास्तविक हत्यारों तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रही है।
बता दें कि बीते 20 अक्तूबर को लार रोड रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित बढ़या हरदो गांव के समीप रामजानकी मार्ग पर वकील यादव निवासी करजहां और विनय यादव निवासी इटहुरा हज्जाम की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने मौके पर पहुंचकर जांच की कमान संभाली थी। घटना के बाद से ही पुलिस की कई टीमें हत्यारों तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रही हैं। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास ही नहीं, बल्कि आने-जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। सूत्रों के मुताबिक, लार के पिपरा चौराहे के आसपास लगे एक कैमरे में रात करीब 10:15 बजे की गतिविधियां महत्वपूर्ण मानी गईं।
वहीं हरखौली स्थित एक फर्नीचर प्रतिष्ठान के कैमरे में रात करीब 11 बजे के बाद के बहुत से फुटेज पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनमें से घटना के राज को उजागर करने में पुलिस लगी है। फुटेज को पुलिस ने घटना के समय और संभावित आवाजाही के साथ जोड़कर देखा है।
रास्ते में पड़ने वाली शराब की दुकान सहित अन्य स्थानों के डीवीआर भी जांच के दायरे में आए। पुलिस का प्रयास है कि अलग-अलग कैमरों में दिखाई देने वाली गतिविधियों को जोड़कर घटनाक्रम की एक स्पष्ट समयरेखा तैयार की जाए।
सूत्रों के अनुसार, जुटाई गई जानकारियों को एक साथ रखकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कवायद चल रही है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फुटेज, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ में मिले तथ्यों का आपस में मिलान कर यह सुनिश्चित किया जाए कि घटना में किसकी क्या भूमिका रही। केवल संदिग्ध गतिविधि के आधार पर किसी को हत्याकांड का आरोपी मानने के बजाय पुलिस साक्ष्यों की पुष्टि करने में जुटी है।