देवरिया। होली के बाजार में बिकने वाली छेना व खोआ की तमाम मिठाइयों को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है। इसके लिए इन पर सिल्वर वर्क व क्रीम लगाई जाती है। धंधेबाज सिल्वर वर्क की जगह एल्युमिनियम वर्क और क्रीम की जगह फ्रोजन का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह के केमिकल युक्त बनावटी सामान सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं।
जानकार बताते हैं कि असली सिल्वर वर्क बेहद पतला और महंगा होता है। इसकी कीमत अधिक होने के कारण धंधेबाज एल्युमिनियम की शीट को मिठाइयों पर चिपका देते हैं। देखने में यह चांदी जैसा ही चमकदार दिखता है, जिससे आम ग्राहक आसानी से धोखा खा जाता है। वहीं क्रीम की जगह कई जगह फ्रोजन व व्हिपिंग पाउडर आधारित बनावटी क्रीम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कृत्रिम रंग व फ्लेवर मिलाए जाते हैं। ये दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदेह हैं।
काजू बर्फी पर सबसे अधिक एल्युमिनियम वर्क का प्रयोग हो रहा है। इसके बाद गुलाब जामुन और छेना से बनी कुछ मिठाइयों पर भी इस तरह के वर्क का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा ठेलों पर बिकने वाली मिठाइयों पर भी इसका प्रयोग करते हैं।
पुरानी मिठाई को दिखाते हैं ताजा
एल्युमिनियम वर्क के प्रयोग से मिठाई की गुणवत्ता तो प्रभावित होती है, उनके खराब हिस्से को भी उसी से छिपाया जाता है। बाजार के जानकार बताते हैं कि जिन मिठाइयों को खराब होने के बाद कारीगर तोड़कर दुबारा बनाते हैं, उस पर एल्युमिनियम की यह चमकदार परत सबसे अधिक होती है। वजह यह कि इन परत के नीचे मिठाई पर पड़ने वाले दाग, धब्बे आसानी से छिप जाते हैं।
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गोरखपुर में पकड़ी गई थी बड़ी खेप
मिठाइयों पर लगने वाले इस एल्युमिनियम वर्क को धंधेबाज गोरखपुर की मंडी से ही मंगाते हैं। पिछले साल गोरखपुर में साहबगंज मंडी के अलावा राप्तीनगर इलाके में इसकी बड़ी खेप पकड़ी गई थी। इस साल भी त्योहार से पहले हर जगह गोरखपुर से इस एल्युमिनियम परत की मोटी खेप पहुंच चुकी है।
स्वास्थ्य के लिए है हानिकारक
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज देवरिया के जनरल फिजिशियन डॉ. निखिलेश मिश्र के अनुसार एल्युमिनियम का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे पेट संबंधी दिक्कतें, उल्टी, दस्त और लंबे समय में अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह अधिक जोखिम भरा है। इसलिए अगर मिठाई पर ऐसी कोई परत चिपकी है तो उसे खाने से पहले जरूर हटा दें।
कोट
मिठाइयों पर अलग से लगाए गए सामान से गुणवत्ता प्रभावित होती है। सिल्वर वर्क की जगह एल्युमिनियम वर्क और खतरनाक है। इसकी जांच कराई जाएगी।
राजीव मिश्र, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, देवरिया