सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ की 16 जून की बैठक में बहुत बड़ा खुलासा हुआ। डिप्लोमाधारी जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंताओं की बैठक में बाढ़ कार्य खंड देवरिया के उच्चाधिकारियों पर संगीन आरोप लगाए गए। संघ ने उच्चाधिकारियों पर तट बंधों और ड्रेनो की मरम्मत में रुचि नहीं लेने का आरोप लगाया। यहां तक कहा गया कि मरम्मत के नाम पर फर्जी माप करने का माहौल बनाया जा रहा है।
संघ के अध्यक्ष ने डिप्लोमाधारी इंजीनियर और सहायक अभियंताओं को फर्जी मेजरमेंट में सहयोग नहीं करने के लिए आगाह किया। अन्यथा कि स्थिति में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने की चेतावनी दी गई। संघ ने कदाचार की जांच में अपने पर सदस्यों की कोई भी मदद करने से इंकार किया है। उल्लेखनीय है कि रुद्रपुर क्षेत्र देवरिया जिले का सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित रहने वाला इलाका है।
इस क्षेत्र के दोआबा और कछार में राप्ती और गोर्रा नदियों से कटान रोकने को करीब 100 किलोमीटर बांध बनाए गए हैं। सिंचाई विभाग इन बंधों की मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपया खर्च करता है। लेकिन दूसरे साल बरसात आते ही बंधे जस के तस जर्जर हालात में पहुंच जाते हैं।
मरम्मत के नाम पर फर्जी मेजरमेंट का मामला बार बार उठता रहा है। इंजीनियर संघ की बैठक के बाद यह पूरी तरह पुष्ट हो गया । इंजीनियर संघ ने बाकायदे प्रस्ताव की कॉपी प्रदेश संगठन और मंडल के मुख्य अभियंता सहित सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को भेजी है। जिसमे स्पष्ट रुप से तटबंधों पर मरम्मत कार्य नहीं होने और फर्जी मापी, फर्जी टीआई बनाने को महौल बनाने का उल्लेख किया गया है।
बैठक के प्रस्ताव की कॉपी अमर उजाला के हाथ लगने के बाद सिंचाई विभाग के अभियंता सकते में आ गए। इस बाबत सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ सिंचाई विभाग देवरिया के खंडीय अध्यक्ष संत सुरेमन ने कहा कि बैठक में बंधो पर मरम्मत कार्य नहीं होने पर चिंता जताई गई। फील्ड में काम करने वाले अभियंताओं की भावनाओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। यह संगठन का अंदरुनी मामला है।