तीन सौ करोड़ खर्च तो मरीजों को क्यों नहीं मिल रहीं सुविधाएं : नोडल अधिकारी
ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने 1:45 मिनट तक लिया मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल का जायजा, मिलीं खामियां, जताई नाराजगी
दवा वितरण काउंटर सहित अन्य भीड़ वाले स्थानों पर कम करें वेटिंग की व्यवस्था
नोडल अधिकारी के कहने पर भी नहीं खुले शौचालय, जाने के बाद खुला ताला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले के नोडल अधिकारी व ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी ने शनिवार को करीब एक घंटे 45 मिनट तक मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान कमियां मिलने पर नाराजगी जताई तथा उसमें सुधार करने के निर्देश दिए। सवालों का जिम्मेेदार जवाब नहीं दे सके।
कहा कि तीन सौ करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं। व्यवस्था को ठीक कर मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराएं, ताकि मरीजों को किसी भी स्थान पर घंटों इंतजार न करना पड़े। वहीं, पार्वतीपुर के चकाचक प्राथमिक स्कूल को दिखाकर खामियों को छिपाने का भी अफसरों ने काम किया है।
नोडल अधिकारी का काफिला जिला अस्पताल में पहुंचा। पहले से मौजूद प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल, सीएमओ डॉ. राजेश झा, प्रभारी सीएमएस डॉ. आरके श्रीवास्तव, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचके मिश्रा ने उनका स्वागत किया। नोडल अधिकारी ने प्राचार्य से बात की। इसके बाद बढ़े और लंबी कतार देख दवा वितरण काउंटर पर पहुंच गए।
बताया गया चार काउंटर बनाए गए हैं। नोडल अधिकारी ने कहा कि दवा लेने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़े यह ठीक नहीं है। यहां बैठने की व्यवस्था न देख उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि भीड़ वाले स्थान पर ऐसी व्यवस्था की जाए कि मरीजों को देर तक प्रतीक्षा न करनी पड़े। सरकार मरीजों की सहूलियत के लिए धन खर्च कर रही है। उन्हें इलाज में आसानी होनी चाहिए। प्राचार्य ने बजट की अनुपलब्धता से खरीदारी में दिक्कत की बात कही। नोडल अधिकारी के पूछने पर बताया गया नान सेलरी बजट में होने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि निर्देश का पालन करें।
उन्होंने बगल की दीवार पर लगी काई को देकर कहा कि छत पर पानी लगने के कारण सीलन पर हो रही है। इस पर ध्यान दिया जाए। साथ ही गंदगी, नीचे जाम नाली को दिखाया और जल निकासी की व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए। कुछ दूरी पर खड़े ठेला के बारे में पूछा और व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया। सफाई के लिए ठेकेदार पर जुर्माना लगाया। यहां सभी दवा न मिलने की शिकायत पर कहा कि मरीजों को फ्री में दवा देनी है। डीएम व सीडीओ को दवा की कमी के बारे में जानकारी दी जाए। जो कमी है उसे दूर कर दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।
इसके बाद पुराने भवन में प्रवेश करते ही बंद कंप्यूटर व बलगम कक्ष के बारे में पूछा और खोलने के लिए कहा, लेकिन चाबी न उपलब्ध होने के कारण वह बगल में शुल्क काउंटर पर पहुंचे, जहां शुल्क की सूची न होने पर बिफर पड़े, उन्होंने तत्काल लगवाने के निर्देश दिए।
इसके बाद लिपिक कार्यालय कक्ष को देखा। उन्होंने कहा कि कार्यालय को भू तल से प्रथम मंजिल पर स्थापित करने के निर्देश दिए। ग्राउंड फ्लोर के कमरों का उपयोग मरीजों की सुविधा के लिए किए जाएं। यहां से आयुष्मान कक्ष में पहुंचे, जहां रखी मशीन व कागज का बंडल देख नाराजगी जताई और उसे हटाने को कहा। खिड़की पर खड़े युवक से पूछा तो बताया कि नाम को ठीक कराने आया है। कर्मचारी ने बताया कि काफी कार्ड पेंडिंग हैं। उन्होंने सीडीओ से ठीक कराने को कहा। कर्मचारी व चालक के बकाया मानदेय का भुगतान आरकेएस के पैसे से करने को कहा।
यहां से दवा वितरण कक्ष का जायजा लिया। दवा की छोटी पर्ची ठीक से न रखे जाने पर भड़के और ठीक से मिलान न होने की बात कही। उन्होंने सुधार लाने को कहा। बैग, आलमारी पर गत्ता रखे देेेख ठीक करने को कहा। फ्रीज के बारे में पूछा तो बताया गया ऐसी दवा नहीं है, जिसे फ्रीज में रखनी पड़े।
इसके बाद दवा भंडार कक्ष पहुंचे। बाहर लगा डिस्प्ले बोर्ड अपडेट न होने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बोर्ड को हर दिन अपडेट करने तथा मरीजों की सुविधा के लिए बाहर लगाने के निर्देश दिए। स्टोर में डीबीडीएमएस देखने को कहा तो बताया कि कंप्यूटर लगे कुछ दिन हुए हैं। अभी वाईफाई का कनेक्शन नहीं हुआ। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब खारिज नहीं होगा तो दवा की जानकारी नहीं होगी। कैसे डिमांड होगी। उन्होंने जल्द व्यवस्था ठीक कराने के निर्देश दिए।
वह आगे बढ़े तो जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को हटाने के निर्देश दिए। उसके बगल में स्थित जेई जांच लैब को सेंट्रल लैब में शिफ्ट करने के लिए कहा। इसके बाद मैटर्न कक्ष से होते हुए बढ़े तो बाथरूम बंद मिलने पर मरीजों के लिए खोलने के निर्देश दिए। ओटी में ऑपरेशन चल रहा था। उन्होंने बाहर ड्रेसिंग के लिए बैठे लोगों से पूछा तो वे व्यवस्था से अपने को संतुष्ट बताए। यहां से एक्सरे कक्ष में पहुंचे, जहां मशीन व कार्य के बारे में जानकारी तथा पोर्टेबल एक्सरे मशीन के बारे में पूछा। बताया गया कि प्रिंटर न होने से मशीन का पूरी तरह उपयोग नहीं हो रहा है। प्रिंटर खरीद कर मशीन चालू करने के निर्देश दिए। यहां से ड्रेसिंग कक्ष में पहुंचे, जहां रख-रखाव ठीक करने तथा स्ट्रेलाइजेशन पट्टी और बेहतर सफाई रखने के निर्देश दिए। बताया गया कि अभी शिफ्ट किया जा रहा है।
इसके बाद नोडल अधिकारी नए भवन स्थित ओपीडी पहुंचे। पर्ची काउंटर व ओपीडी में बैठने की समुचित व्यवस्था न देख उन्होंने कार्यदायी संस्था के एक्सईएन से फर्नीचर खरीदने के लिए बचे 18 करोड़ रुपये प्राचार्य को ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। आगे बढ़े तो शौचालय बंद देख ताला खोलवाने को कहा, लेकिन चाबी ही नहीं मिली। वह आश्चर्य व्यक्त करते हुए आगे बढ़े। मेडिसिन विभाग के सामने मरीजों की भीड़ थी। डॉक्टर कक्ष में चिकित्सकों से मरीजों की जानकारी ली। ग्लब्स, मरीजों के लिए स्टूल, महिला मरीजों की जांच के लिए व्यवस्था ठीक नहीं होने, बेसिन पर तौलिया, साबुन, टंग फ्रेशर, टार्च न होने पर सवाल खड़े किए और सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बगल में एसआर कक्ष में सफाई ठीक कराने तथा मरीज के पंजीकरण का रजिस्टर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
नोडल अधिकारी ने दंत विभाग में चिकित्सक से संसाधन, मरीज की संख्या आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने इलाज के लिए एकाग्रता जरूरी है। विभाग को भीड़ से हटकर ऊपरी मंजिल पर शिफ्ट करने तथा पांच मरीजों के इलाज के लिए पांच कुर्सी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। टीवी व चेस्ट विभाग में मरीजों की जांच का टेबल और बड़ा होने तथा रखी आलमारी हटाने के निर्देश तथा गंदी चादर देखकर उसे बदलने के बारे में पूछा तो बताया गया कि दो से तीन दिन में चेंज होता है।
यहां से ईएनटी विभाग को देखे। सर्जरी विभाग में मरीज के एग्जामिन की व्यवस्था ठीक कराने का निर्देश दिए। हड्डी के पास खाली कमरे में खुली तार देेख नाराजगी जताई। अन्य दो खाली पड़े कमरों को देखा। यहां बाथरूम खुले थे। ओपीडी में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोग फर्श पर बैठे थे।
इसके बाद नोडल अधिकारी ने प्रथम तल पर बन रहे वार्ड को देखा तथा पांचवीं मंजिल तक की जानकारी ली। वीआईपी वार्ड के बारे में पूछने पर बताया गया कि अटैच बाथरूम नहीं है। उन्होंने भवन में लगे चार लिफ्ट को जल्द शुरू कराने के निर्देश दिए। इसके बाद रवाना हो गए।
नहीं मिली पूरी दवा
नोडल अधिकारी दवा काउंटर पर मौजूद थे। इसी बीच रुद्रपुर क्षेत्र के जमुनहीं निवासी शिवानंद त्रिपाठी ने शिकायत की कि वह पत्नी वधुधा त्रिपाठी का इलाज कराए थे। पर्ची पर लिखी दवा नहीं मिल रही है। अधिकांश मरीजों को पैरासिटामाल, आयरन, कैल्सियम की दवा ही दी जाती है। पूछने पर डांट कर भगा दिया जाता है। उन्होंने प्रभारी सीएमएस से दवा की उपलब्धता के बारे में पूछा और सभी दवाएं मरीजों को देने के निर्देश दिए।
साहब ठीक नहीं मिलता भोजन
नोडल अधिकारी से खुखुंदू के नरायनपुर निवासी रघुवंश ने कहा कि वह नाती शिवम तिवारी को लेकर भर्ती हैं। साहब अस्पताल में भोजन ठीक नहीं मिला। एक रोटी, आलू की सब्जी, पतली दाल मिलती है। डाइट ठीक नहीं है।
होम्योपैथिक कक्ष के कार्य को सराहा
नोडल अधिकारी होम्योपैथिक कक्ष में पहुंचे तो चिकित्सक व कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने दवा, इलाज के बारे में पूछा। बताया कि प्रतिदिन डेढ़ सौ मरीजों का इलाज होता है। उन्होंने एक मरीज से पूछा तो वह संतुष्ट दिखा। इस पर उन्होंने चिकित्सक व कर्मचारियों के कार्य की सराहना की।
प्रचार सामग्री देख बिफरे नोडल अधिकारी
नोडल अधिकारी मेडिसिन विभाग के कक्ष-दो में पहुंचे तो एसआर मौजूद थे। वह चिकित्सक के मेज और डस्टबिन में प्राइवेट कंपनियों की प्रचार सामग्री देख बिफर पड़े। कहा कि प्राइवेट दवा के प्रचार के कक्ष नहीं बनने चाहिए। इस पर रोक लगाई जाए।
स्ट्रेचर न मिलने पर सहारा देकर मरीजों को ले गए परिजन
नोडल अधिकारी का निरीक्षण चल रहा था। वह प्रथम मंजिल पर मौजूद थे। इधर, शहर के साकेत नगर मोहल्ले की साठ वर्षीया सावित्री देवी के पैर का प्लास्टर कराने के बाद परिजन कंधे का सहारा देकर किसी तरह सड़क पर वाहन तक ले गए। उनके पति रामविलास यादव ने कहा कि फिसल कर गिरने से पत्नी सावित्री के बाएं पैर की हड्डी टूट गई है। शुक्रवार को आया तो आधार कार्ड जमा करने के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिला। आज प्लास्टर कराने के बाद स्ट्रेचर की तलाश की, लेकिन नहीं मिला।