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तत्कालीन बीडीओ, लेखाधिकारी पर नहीं दर्ज हुआ केस

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सीडीओ बोले, कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया है पत्र
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अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बनकटा ब्लॉक में बिना कार्य के 1.70 करोड़ भुगतान के मामले में डीसी मनरेगा ने नौ प्रधानों, छह सेक्रेट्री और पांच तकनीकी सहायकों समेत 20 लोगों पर कूटरचित दस्तावेज से धन गबन करने के मामले में केस दर्ज कराया गया है। इसमें तत्कालीन बीडीओ और लेखाधिकारी का नाम न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मनरेगा में ब्लॉक के लोग दस, टीएस दो, सेक्रेट्री चार और जेई चार प्रतिशत कमीशन लेते हैं। कमीशन की खेल में बिना कार्य कराए ही भुगतान की परंपरा है।
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तत्कालीन बीडीओ और डीआरडीए के एई चंद्रभान सिंह के कार्यकाल में 42 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों और सेक्रेटरी ने लिखकर प्रमाण पत्र दिया कि उनके गांव में इंटरलॉकिंग, सीसी रोड का निर्माण करा लिया गया है। इसके बाद ही एक करोड़ 70 लाख 29 हजार का भुगतान हुआ। भुगतान से पहले खंड विकास अधिकारी द्वारा कार्यों का सत्यापन कराया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भलुअनी ब्लॉक के ग्राम प्रधान संगठन से जुड़े नीतिश पाठक के अनुसार, जांच कराई जाए तो जिले के सभी विकास खंडों में ऐसे मामले सामने आएंगे। आरोप लगाया कि मनरेगा में खंड विकास अधिकारी, एपीओ, टीएस, सेक्रेट्री, ऑपरेटर, जेई सभी कमीशन लेते हैं। ग्राम प्रधान बिना कार्य कराएं भुगतान निकाल लें या कार्य कराएं जाने के बाद, इनसे कोई मतलब नहीं रहता है। इन्हें सिर्फ कमीशन से सरोकार है। लॉक डाउन समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधान सड़कों पर उतरेंगे और अधिकारियों के कमीशन की पोल खोलेंगे। पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष राजेश मिश्रा का कहना है कि ग्राम प्रधान अधिकारियों के कमीशन और बेगारी से परेशान हैं। कमीशन लेने की शिकायत अक्सर आती रहती है। अधिकारियों से कई बार इस संबंध में कहा गया। लेकिन वे सुनकर चुप हो जाते हैं। खंड विकास अधिकारी पर भी केस दर्ज होना चाहिए। बनकटा विकास खंड की ब्लॉक अध्यक्ष पूनम सिंह ने कहा कि अधिकारी सिर्फ प्रधानों पर ही कार्रवाई क्यों कर रहे हैं। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
जहां हुए कार्य नहीं हुआ भुगतान
बनकटा। विकास खंड में मनरेगा के तहत हुए घोटाले की जांच में सही तथ्य पांच जांच अधिकारियों ने उजागर नहीं किया है। इसके पीछे उनकी जो भी मंशा हो वहीं बताएंगे। नियरवा ग्राम पंचायत में निर्माण कार्य 50 प्रतिशत पूर्ण हैं। नौ लाख का भुगतान होना चाहिए लेकिन अस्सी हजार का भुगतान हुआ। सकरवा टोला में इंटरलॉकिंग पर चार लाख खर्च कर और हाटा में पशु शेड पर तकरीबन एक लाख खर्च किया गया है। इनका भुगतान नहीं हुआ। फिर भी नियरवा के ग्राम प्रधान, टीएस, सेक्रेटरी पर गाज गिर गई। लेकिन जिन्हें मैटेरियल गिरा देने पर क्लीन चिट दें गई उसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। तत्कालीन खंड विकास अधिकारी एवं लेखाधिकारी के खिलाफ शासन को पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए लिखा गया है। किसी को भी इस मामले में बक्शा नहीं जाएगा। जो भी दोषी होगा कार्रवाई होगी। कमीशन की बात न तो मेरे संज्ञान में है और न ही किसी ग्राम प्रधान ने मुझसे लिखित शिकायत की है।
- शिव शरणप्पा
मुख्य विकास अधिकारी
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