निषाद जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने को लेकर आंदोलन को नए सिरे रणनीति बनाई जा रही है। बस्ती के कसरवल कांड के बाद सुर्खियों में आया निषाद आरक्षण का मुद्दा रुद्रपुर में भी सुलगने लगा है। रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में निषाद बिरादरी की सबसे अधिक संख्या होने के कारण यहां निषाद आरक्षण का मुद्दा तेजी से सुलग रहा है। सोमवार को निषाद बाहुल्य अवस्थी गांव में निषादों की महापंचायत बुलाई गई।
राष्ट्रीय निषाद एकता मंच की ओर से आयोजित महापंचायत में पूर्वांचल के कई जिलों से निषाद जाति के लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने निषाद आरक्षण को लेकर कसरवल में शहीद हुए अखिलेश निषाद की कुर्बानी बेजा नहीं जाने देने की कसम खाई। महापंचायत में शहीद अखिलेश निषाद अमर रहे के नारे लगें।
संतकबीरनगर जनपद के निषाद नेता विनोद निषाद ने कहा कि निषाद, केवट और साहनी बिरादरी के लोगों के साथ सदियों से अत्याचार होता चला रहा है। निषाद जाति के लोगों का पूरा जीवन नदियों पर टिका था। नदियों में प्रदूषण के चलते इस बिरादरी का रोजगार छिन गया।
अपनी जायज मांगों के लेकर आंदोलन कर रहे निषाद जाति के लोगों पर गोलियां बरसाई गईं। उन्होंने कहा कि निषाद बिरादरी को अनुसूचित जाति का दर्जा देने में आनाकानी कर रही सरकारों को जाना पड़ेगा। गगहा के व्यास निषाद ने कहा कि निषाद जाति के लोग अपना हक लेकर रहेंगे।
इसके लिए गांव-गांव मुहिम चलाई जाएगी। निषाद एकता मंच के बैनर तले देश भर के निषादों को एकजुट किया जाएगा। रमाशंकर निषाद ने कहा कि निषाद एकता मंच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर निषाद जाति का नेता बैठाने को पूरे प्रदेश में निषादों को एकजुट करेगा। महापंचायत को चंद्रशेखर निषाद, रमाकांत साहनी, नरसिंह निषाद, जगदीश निषाद, रामकिशुन, सर्वदेव, रामेश्वर, मदन निषाद आदि ने संबोधित किया।