कोरोना संकट के पांच माह
न तो रोजगार मिला न ही ठीक से इलाज हो पा रहा
मिठाई दुकानदार, ठेले, खोमचे वालों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। उम्मीदों और तरक्की की पटरी पर दौड़ रही जीवन की गाड़ी पर कोरोना काल ने ब्रेक लगा दिया। 24 मार्च को लॉकडाउन के दौरान लोगों की जिंदगी घरों में कैद हुई तो पांच माह बाद भी कोई खास सुधार नहीं हो पा रहा है। शहरों में अच्छी आमदनी करने वाले हजारों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए। घर आने के बाद पेट भरने के लिए टेक्निकल लोग नॉन टेक्निकल काम करने के लिए मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग का ओपीडी बंद होने के कारण लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से बीमार लोगों की जान भी जा रही है। दूसरे प्रांतों एवं जिलों से एक लाख से अधिक लोग अपने घर लौटे तो अधिकांश अब भी नौकरी पर नहीं लौट सके हैं। गांवों में मारपीट बढ़ने का एक यह भी कारण है कि बाहर से लोग आए हैं और जमीन-जायदाद को लेकर वह झगड़ रहे हैं। बेरोजगारी में सबसे खराब स्थिति मिठाई दुकानदार, ठेले, खोमचे और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले लोगों की है। इनका जीवन अब भी पटरी पर नहीं लौट सका है। सभी आर्थिक तंगी का दंश झेल रहे हैं। कागजी आंकड़ों को छोड़ दिया जाए तो रोजगार के मामले में सरकार की योजना हवा-हवाई साबित हो रही है।
50,624 यूनिट पांच माह में बढ़ा
देवरिया। लॉकडाउन में घर आने वाले लोगों को राशन देने का आदेश दिया। परदेश से आए 50,624 लोग इन दिनों राशन ले रहे हैं। एक मार्च को 23,50,682 यूनिट राशन लोग ले रहे थे। महामारी में घर आने वालों का सर्वे हुआ तो 24,01,406 यूनिट हो गया। महामारी में आए 50,624 लोग अब भी घर पर हैं और राशन उठा रहे हैं।
83,431 प्रवासी आए घर
देवरिया। महामारी के दौरान जिले में 83,431 प्रवासी लोग आए। सरकार ने प्रवासियों को राशन किट देने का एलान किया था। इसमें शर्त थी कि एक परिवार में भले ही चार लोग आए हों लेकिन राशन किट एक ही दिया जाएगा। शासन के आंकड़े देखा जाए तो जिले के 73,368 लोगों को राशन किट दी जा चुकी है। दस दिन में ही राशन किट खत्म हो गई और अब रोजगार के लिए परेशान हैं।
श्रमिकों को दिए गए 2.92 करोड़
देवरिया। कोरोना काल में प्रभावित ठेला, खोमचा वाले श्रमिकों को एक-एक हजार रुपये दिए गए। जिला प्रशासन ने 29,282 श्रमिकों को चिह्नित किया था। इनके बैंक अकाउंट में 2.92 करोड़ रुपये भेजे गए। कोरोना काल में इनके लिए यह अर्थिक मदद कारगर साबित हुई, हालांकि प्रशासन ने जिस पैमाने से श्रमिकों की सूची बनाई थी। उससे अधिकांश श्रमिक वंचित रह गए थे।
परदेश से आए लोग, लाए कोरोना
देवरिया। मार्च से लेकर 23 अगस्त तक 35,922 लोगों का सैंपलिंग हुई है, जबकि 30,416 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। 3100 से अधिक लोग पॉजिटिव आएं हैं। मार्च से कोरोना की जांच शुरू जरूर हुई। लेकिन 28 अप्रैल तक जिले में एक भी कोरोना के पॉजिटिव मरीज नहीं मिले। पहला मरीज 29 अप्रैल को मिला जो मुुंबई से आया था। इसके संपर्क में रहने वाला दूसरा मरीज 30 अप्रैल को मिला। अप्रैल में दो और मई में 134 लोग पॉजिटिव मिले। परदेश से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ जिले में कोरोना का ग्राफ बढ़ने लगा। अब तक कोरोना से 26 लोगों की मौत हो चुकी है।
छह कोविड-19 अस्पताल बनाए गए, तीन सक्रिय
देवरिया। संक्रमितों के इलाज के लिए सेंट्रल एकेडमी को कोविड-19 अस्पताल बनाया गया है। इसके अलावा मैटरनिटी विंग को भी 160 बेड का अस्पताल बनाया गया है। इसके अलावा जिला अस्पताल एल-टू का अस्पताल बनाया गया है और दस बेड का आइसोलेशन वार्ड है। गंभीर मरीजों को बस्ती या गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है।
संक्रमितों के लिए शुरू हुआ ‘हेलो डॉक्टर’
देवरिया। डीएम अमित किशोर ने बताया कि 800 से अधिक कोरोना संक्रमित होम आइसोलेशन में हैं। इनकी सेहत की हाल कंट्रोल रूम से डॉक्टरों की टीम फोन कर ले रही है। दिक्कत होने पर दवा बताया जा रहा है जो आशा वर्करों के माध्यम से मरीजों के घर तक पहुंचाया जा रहा है। दिन में दो बार डॉक्टर मरीजों से बात कर रहे हैं।
नहीं आ रहे जिला अस्पताल में मरीज
देवरिया। कोरोना काल में ओपीडी बंद हो गया है। जिला अस्पताल में सिर्फ सर्जिकल ओपीडी चल रहा है। करीब 200 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं, कोरोना काल से पहले जिला अस्पताल में एक दिन में 1800 से 2100 मरीजों का प्रतिदिन रजिस्ट्रेशन होता था। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल पर काफी भीड़ रहती थी। इन दिनों सुनसान सा दिख रहा है।
सामान्य रोगियों को आसानी से नहीं मिल रहा इलाज
देवरिया। कोरोना काल में समान्य रोगियों को इलाज की दुश्वारियां झेलनी पड़ रहीं हैं। प्राइवेट चिकित्सक इमरजेंसी के नाम पर सामान्य रोगियों से भी 500 रुपये फीस वसूल रहे हैं। मजबूरी में मरीजों को इतनी फीस देनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में ऑपरेशन कम हो रहे हैं। इसकी वजह से हार्निया, हाइड्रोसिल के ऑपरेशन के भी अधिक रुपये प्राइवेट अस्पताल संचालक वसूल रहे हैं।
1,04,431 लोगों को मनरेगा से मिला रोजगार
देवरिया। पांच माह में मनरेगा से 1,04,431 लोगों को रोजगार मिला है। कोरोना काल में शहरों से गांवों की ओर कूच किए लोगों के सामने जब आर्थिक तंगी आई तो मनरेगा में काम करना शुरू किए। इसमें जिले के रहने वाले अन्य लोग भी शामिल हैं। जिला सेवा योजन कार्यालय की ओर से 200 लोगों को रोजगार मुहैया कराया गया है।