देवरिया। देश के विभाजन के दर्द को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। विभाजन और इसके कारण उत्पन्न हुईं परिस्थितियां जैसे तुष्टिकरण की राजनीति, विभाजनकारी ताकतों के विचारों को हावी होने देना और लोगों को नुकसान पहुंचाने वाले सोच के साथ खड़ा होना, ऐसी स्थिति फिर कभी नहीं होनी चाहिए। कुल मिलाकर कहें तो नेहरू और जिन्ना की सत्ता पर जल्दी बैठने की महत्वाकांक्षा और तुष्टिकरण की नीति भारत के बंटवारे की असली वजह थी। ये बातें सदर सांसद डाॅ. रमापति राम त्रिपाठी ने जिला पंचायत परिसर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि अनेकानेक धार्मिक और और जातीय दंगे करवाने के बाद भी कांग्रेस आज तक छाती ठोंककर अपने आप को धर्मनिरपेक्ष ही कहती हैं। समाज में जितनी अधिक घृणा कांग्रेस ने फैलाई, जितनी विभाजक रेखाएं उसने खींची, उसका एक प्रतिशत अंग्रेजों ने भी नहीं किया होगा। पंडित नेहरु ने मात्र प्रधानमंत्री की कुर्सी पाने के लिए न केवल देश के टुकड़े करवाए बल्कि लाखों लोगों के खून से भारत भूमि को नहला दिया। घृणा का जो बीज उस समय बोया गया उन्हें पूर्णतया नष्ट करने के लिए आने वाली कई पीढ़ियों को मिलकर प्रयास करना होगा। आज जो कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की ध्वजवाहक बनने का ढोंग करती है ,उसी कांग्रेस ने कई सांप्रदायिक कानूनों को पारित करवाने में अंग्रेजों की सहायता की थी।