अंडर-15 नेशनल कुश्ती में नेहा ने जीता है कांस्य पदक
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अंडर-15 नेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में जिले की खिलाड़ी नेहा ने कांस्य पदक जीता है। उन्होंने 62 किलो भार वर्ग में केरल की खिलाड़ी आदिश्री को कालाजंग दांव लगाकर चित किया। कांस्य पदक जीतकर लौटी नेहा को जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने रविवार सम्मानित किया। उधर, नेहा के गांव बंजरिया में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों ने नेहा की इस सफलता पर बधाई दी है।
जिले के तरकुलवा क्षेत्र के बंजरिया गांव निवासी अनिरुद्ध गुप्ता की सबसे छोटी बेटी नेहा गुप्ता ने नोएडा में 27 से 30 मार्च तक आयोजित अंडर-15 राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में 62 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। वह वर्तमान में अयोध्या खेल छात्रावास में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। 29 मार्च रात्रि दस बजे नेशलन कुश्ती प्रतियोगिता के अंडर-15 में तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में उन्होंने केरल की खिलाड़ी को धूल चटाई, उनको कांस्य पदक प्राप्त हुआ। वहां से कांस्य पदक जीतकर जब नेहा रविवार को देवरिया पहुंचीं तो जिलाधिकारी ने उनको सम्मानित किया। डीएम ने इस सफलता पर उनको प्रोत्साहन राशि के रूप में 21 हज़ार का चेक, श्रीराम मंदिर का चित्र और शॉल लेकर सम्मानित किया। नेहा की इस सफलता पर बंजरिया गांव में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीण अपनी बिटिया के सम्मानित करने के लिए जोरशोर से तैयारी कर रहे हैं।
ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना नेहा का सपना
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस वाक्य को सच साबित करने वाली नेहा की पारिवारिक स्थिति काफी खराब है। पिता पटना में फल बेचकर परिवार की परवरिश करते हैं। बड़ी बहन रुपाली कुश्ती में नेशनल खेल चुकी हैं। दूसरे नंबर की शिखा एथलीट हैं। वह यूपी और बिहार से 800 और 1500 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती हैं। तीसरे नंबर का भाई विराट ग्रेजुएट करके पिता के धंधे में हाथ बंटाता है। इसके बावजूद नेहा के हौसले बुलंद हैं। वह ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती हैं।
ज़मीन बेच दूंगा पर बेटियों के हौसले नहीं टूटने दूंगा
कांस्य पदक विजेता नेहा के पिता अनिरुद्ध गुप्ता बताते हैं कि खेलों की तैयारी में काफी धन खर्च होता है। आर्थिक रूप से कमजोर हूं लेकिन बेटियों के हौसले को किसी कीमत पर टूटने नहीं दूंगा। जरूरत पड़ी तो ज़मीन जायदाद बेच दूंगा। वह कहते हैं कि कोई स्पॉन्सर मिल जाता तो बेटी ओलंपिक में अवश्य देश के लिए गोल्ड मेडल जीत जाती।