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Mulayam Singh Yadav Death: मोहन सिंह के शव को कंधा देकर निभाया दोस्ती का फर्ज, अब खुद चले गए मुलायम

Tue, 11 Oct 2022 10:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।

सार

अंतिम बार देवरिया में 24 सितंबर 2013 को वह मोहन सिंह के निधन पर गौर जयनगर बरहज पहुंचे, जहां उन्होंने समाजवाद का झंडा एक साथ लेकर सियासत के कई पड़ाव देखने वाले मोहन सिंह की अर्थी को कंधा देकर आखिरी सफर को भरे दिल से पूरा किया था।
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स्व.मुलायम सिंह यादव को सम्मानित करते पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी - फोटो : DEORIA
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विस्तार
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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का जिले से गहरा नाता रहा है, क्योंकि सपा का मजबूत आधार जनपद में रह चुका है। यहां के समाजवादी नेताओं ने उनके साथ कंधे से कंधा मिलकर चलने का कार्य किया है। सियासत के सफर ने पहली बार सहकारिता मंत्री रहते जनसभा की और अंतिम बार अपने साथी मोहन सिंह के शव को कंधा देने के लिए आए थे। सोमवार को वह खुद हमेशा के लिए दुनिया छोड़ चले गए। उनके निधन पर जिले के सपा नेताओं में गहरा शोक है। अधिकतर बड़े नेता दिल्ली पहुंच गए हैं।

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समाजवादी नेताओं का गढ़ माना जाने वाला जनपद मुलायम सिंह यादव के दिल में रचा-बसा था। अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत उन्होंने गोरखपुर मंडल में देवरिया से की थी। पहली बार उन्होंने सहकारिता मंत्री रहते हुए 1978 में भटनी रेलवे स्टेशन पर जनसभा में हुंकार भरी थी। करीब 44 साल के दौरान मुलायम कई बार जिले में आए और सभा को संबोधित करने के अलावा अपने साथियों के घर जाकर चाय पी और भोजन किया। इसके कारण मुलायम से जिले के कई सपा नेताओं के गहरे रिश्ते हो गए थे।

अंतिम बार जिले में 24 सितंबर 2013 को वह मोहन सिंह के निधन पर गौर जयनगर बरहज पहुंचे, जहां उन्होंने समाजवाद का झंडा एक साथ लेकर सियासत के कई पड़ाव देखने वाले मोहन सिंह की अर्थी को कंधा देकर आखिरी सफर को भरे दिल से पूरा किया था। पूर्व राज्य सभा सदस्य कनलता सिंह ने बताया कि उनकी बातें आज भी जेहन में हैं। उन्होंने कहा था कि आपने पिता खोया और मैंने अपना सच्चा साथी। मुझे दूसरा मोहन नहीं मिल सकता है। बुजुर्ग होने के बाद उन्होंने कहा कि मैं भी कंधा दूंगा। यह सफर जिले में उनका अंतिम था। आज उनके निधन से गहरा सदमा पहुंचा है। हमने एक पिता की तरह अभिभावक खो दिया है।

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