यूपीएमसीएल के सप्लाई न करने और टेंडर के बाद आपूर्ति न होने से आई दिक्कत
मेडिकल कॉलेज सहित पांच केंद्रों पर आयुष्मान को छोड़ नहीं हो रहा ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज सहित के जिले के पांच स्वास्थ्य केंद्रों पर लेंस की कमी से मोतियाबिंद का ऑपरेशन ठप है। मेडिकल कॉलेज में हर रोज 20 से 25 की संख्या में मरीज लौट रहे हैं। इतना ही नहीं निशुल्क मिलने वाली दवा और काला चश्मा भी नहीं है। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 500 से अधिक लोग ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं। यूपीएमसीएल से सप्लाई न होने और टेंडर के बाद ठेकेदार के आपूर्ति से पीछे हटने से दिक्कत आई है।
राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद का ऑपरेशन कर मरीजों के आंखों में रोशनी देने का कार्य होता है। इसके तहत मेडिकल कॉलेज के अलावा अन्य चार सीएचसी पर भी निशुल्क ऑपरेशन की सुविधा है। मेडिकल कॉलेज ओपीडी में मोतियाबिंद के मरीजों को चिह्नित कर ऑपरेशन किया जाता है। करीब एक माह से अधिक समय से लेंस, दवा व अन्य सामग्री न होने से ऑपरेशन बंद है। आयुष्मान कार्डधारक मरीज का ऑपरेशन किया जा रहा है, जबकि अन्य मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
ऑपरेशन में लगने वाले लेंस, दवा सहित अन्य सामग्री की यूपीएमसीएल से आपूर्ति होती थी, लेकिन इस साल सप्लाई नहीं की गई है। पिछले वर्ष के लेंस व सामग्री से काम चलाया गया। इसके बाद मुख्यालय से करीब एक हजार लेंस की खरीदारी की अनुमति मिली। कुछ लेंस मंगाए गए। इसके बाद खरीदारी के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन ठेकेदार सप्लाई करने से पीछे हट गया। इस वजह से ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है।
विभाग लेंस मंगाने की प्रक्रिया में लगा है, लेकिन मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वे अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं, जिला ऑपरेशन में पिछड़ रहा है।
चार सीएचसी में भी ऑपरेशन बंद
देवरिया। जिले के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा है। इसमें सीएचसी बरहज, तरकुलवा, गौरीबाजार, सलेमपुर शामिल हैं। इन केंद्रों पर नेत्र सर्जन सहित अन्य स्टाफ तैनात हैं। लेकिन आयुष्मान कार्डधारकों का ही ऑपरेशन हो रहा है। अन्य मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
सलेमपुर केंद्र पर बचे हुए और इस साल मिले लेंस से काम चल रहा था, लेकिन वह भी समाप्त हो गया है। जबकि हर रोज पंद्रह से बीस मरीज ऑपरेशन के लिए आते हैं। यही हाल तरकुलवा और गौरीबाजार केंद्र का है। इन केंद्रों पर भी आने वाले मरीजों को निराश लौटना पड़ रहा है।
मायूस होकर लौट रहे मरीज
बरहज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दो मार्च से मोतियाबिंद का ऑपरेशन ठप है। इससे मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं। जिम्मेदार संसाधनों की कमी बता रहे हैं।
यहां सप्ताह में 100-125, जबकि सर्दी के मौसम में मरीजों की संख्या करीब 200 तक पहुंच जाती है। ऑपरेशन के लिए नगर के अलावा भलुअनी, बेल्थरा, मऊ, आजमगढ़ आदि जगहों के मरीज आते हैं। अस्पताल में लेंस, चश्मा, दवा आदि न होने और ऑपरेशन बंद होने के कारण मरीज लौट रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय पाल ने बताया कि नेत्र ऑपरेशन के लिए पांच मार्च और पहले भी इंडेंट भेजा गया है। सामान मिलते ही ऑपरेशन शुरू करा दिया जाएगा।
इन दवाओं की होती है जरूरत
मोतियाबिंद के ऑपरेशन के पहले व बाद में आंख में ड्राॅप डाले जाते हैं। इसमें टीआरपी ड्राॅप, एंटीबायोटिक ड्राॅप, सूजन, लाली कम करने के ड्राॅप के अलावा एसआईसीएस ब्लेड की जरूरत होती है। यह सब भी समाप्त हो गया है।
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चंदे से मंगाए लेंस
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में लेंस की कमी से ऑपरेशन ठप होने पर दो माह पहले डॉक्टरों ने जनता के हित को देखते हुए आपस में चंदा से करीब 300 लेंस मंगाए थे। वह भी समाप्त हो गया है। इससे ऑपरेशन ठप है।
आंख के ऑपरेशन के लिए बड़ी उम्मीद के साथ सीएचसी पर आई थी। लेकिन परिसर में चस्पा नोटिस देखकर काफी मायूसी हुई है।
-राजमनी परसियां ओझा, भलुअनी
अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा से काफी मदद मिलती थी। ऑपरेशन नहीं होने से प्राइवेट में लंबी और महंगी लिस्ट पकड़ा दी जा रही है।
-राधिका देवी, देईडीहा
मेडिकल कॉलेज में परीक्षण के बाद डॉक्टर ने मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए डेट दी। कई बार आया, लेकिन ऑपरेशन नहीं किया जा रहा है।
-सुदामा, अहिरौली बघेल
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर में आयुष्मान कार्ड धारकों की ही आंख का ऑपरेशन हो रहा है। मेरे पास कार्ड नहीं है। मैं परेशान हूं।
-शीला पांडेय, पिपरा मोहन, सलेमपुर
सीएचसी सलेमपुर में अपने एक रिश्तेदार की आंख के ऑपरेशन के लिए कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। केवल आयुष्मान कार्ड धारकों का ऑपरेशन हो रहा है।
-उदय नारायण तिवारी, डुमवलिया
कोट
यूपीएमसीएल से इस साल सप्लाई नहीं हुई। इसकी वजह से दिक्कत आई है। टेंडर किया गया था, लेकिन ठेकेदार ने सप्लाई करने से हाथ पीछे खींच लिया। फिर से लेंस सहित अन्य सामग्री मंगाने की प्रक्रिया की गई। जल्द ही सभी केंद्रों को सामान उपलब्ध करा दिया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के लिए अलग से बजट की मांग भी गई है।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ