देवरिया। शहर की सड़कों पर दो लाख से ज्यादा वाहन ऐसे दौड़ रहे हैं जिनकी सड़कों पर चलने की समय सीमा पूरी हो चुकी है और उनका पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) सर्टिफिकेट नहीं है। ऐसे वाहनों से निकल रहा जहरीला धुआं लोगों को सांस का रोगी बना रहा है। वहीं, परिवहन विभाग ऐसे वाहनों पर कार्रवाई करने में लापरवाही बरत रहा है। नतीजतन मालगोदाम, रेलवे स्टेशन रोड, सिविल लाइंस, कसया रोड इलाके की वायु की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। ऐसे में सभी को सजग रहने की विशेष आवश्यकता है।
वाहनों के धुएं से शरीर को बेहद नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक तत्व कार्बन मोनो ऑॅक्साइड, कार्बन सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड आदि निकलते हैं। एआरटीओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार विभाग में पंजीकृत कुल साढ़े पांच लाख वाहनों में करीब दो लाख से अधिक ऐसे वाहन हैं जिनके सड़क पर चलने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। वहीं, रोडवेज के निगम व अनुबंधित मिलाकर कुल 195 बसों में 80 ऐसी हैं जो बिना प्रदूषण की जांच के ही चलती हैं। ऐसे में इन वाहनों से निकलने वाला धुआं हृदय, अस्थमा और सांस के रोगियों के लिए बेहद नुकसानदायक है। चिकित्सक भी इस समय भीड़ भाड़ वाले इलाके से जाने से बचने व बढि़या गुणवत्ता वाले मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं।
बिना वाहन लाए भी बना दे रहे प्रमाणपत्र
जिले में छह प्रदूषण जांच केंद्रों को विभाग ने अनुमति प्रदान की है। दो एआरटीओ कार्यालय एवं अन्य तहसील क्षेत्रों में हैं। खास बात यह है कि कुछ प्रदूषण जांच केंद्र ऐसे हैं जहां अधिक रुपये लेकर बिना गाड़ी की जांच कराए ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। इसे लेकर अधिकारी भी गंभीर नहीं दिखते हैं। जबकि नियम यह है कि नए वाहन पर एक साल एवं पुराने वाहन की हर छह माह पर जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। जनपद में अभी दोपहिया, चारपहिया सभी वाहनों को मिलाकर कुल संख्या साढ़े पांच लाख के करीब है, इनमें दो लाख से अधिक ऐसे वाहन हैं जो बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन चलाना नियम विरुद्ध है। अक्सर जांच के दौरान ऐसा पाए जाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है। सभी वाहन स्वामी इसे अवश्य दुरुस्त करा लें, विभागीय स्तर पर फिटनेस के लिए आने वाले वाहनों के लिए पहले प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- आशुतोष शुक्ल, एआरटीओ
ये इलाके हैं संवेदशनशील
शहर के मालगोदाम रोड, रेलवे स्टेशन रोड, सिविल लाइंस, बस स्टेशन की हवा स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से खतरनाक साबित हो रही है। बीते 25 अक्तूबर को एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) जहां 130 दर्ज किया गया था वह 30 अक्तूबर को बढ़कर 146 तक पहुंच गया। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हवा में इतना प्रदूषण होने से आंखों में जलन के अलावा सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। बच्चों की सेहत पर भी विपरीत असर पड़ता है।
वाहनों का प्रदूषण पुराने दमा वाले मरीज, सीओपीडी के मरीजों के लिए ट्रिगर फैक्टर का काम करता है। इससे इन रोगियों को दिक्कत हो सकती है। जो भी जहरीला धुआं है वह फेफड़े में ही जाएगा, इससे फेफड़े में सिकुड़न व फैलाव पर असर पड़ने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी। सांस फूल सकती है।
- डॉ. अनुराग शुक्ला, अध्यक्ष, चेस्ट विभाग मेडिकल कॉलेज
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बचाव के लिए ये उपाय अवश्य करें
- मास्क पहनकर ही बाहर जाएं
- ठंड की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में पर्याप्त बचाव के उपाय करें
- भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें
- दमा, सीओपीडी के मरीज हैं तो दवा का सेवन बंद न करें।
इस तरह खराब हुई हवा की गुणवत्ता
तारीख एक्यूआई
- 25 अक्तूबर 130
- 26 अक्तूबर 135
- 27 अक्तूबर 141
- 28 अक्तूबर 143
- 29 अक्तूबर 144
- 30 अक्तूबर 146