यूपी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में मिला था प्रस्ताव, शुरू हुआ सत्यापन तो खुलने लगी पोल
कई उद्यमियों के पास न जमीन न पूंजी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। यूपी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के लिए जिले में करीब 2053 करोड़ रुपये के हुए निवेश के अभियान को बड़ा झटका लगा है। अनुबंध करने वाले 296 उद्यमियों के सत्यापन में करीब 11 सौ करोड़ के निवेश प्रस्ताव बोगस पाए गए हैं। यही नहीं बड़े निवेश अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके हैं। ऐसे में सरकार का ग्लोबल इंवेटर्स समिट के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने के सपने को झटका लग रहा है। केवल 60 उद्यमी ही उद्योग लगाने के लिए राजी हुए हैं। अब विभाग को बकरी पालन पर भरोसा है, क्योंकि करीब 180 के उद्यमियों ने इस व्यवसाय को चुना है।
प्रशासन इन दिनों ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी कर रहा है। इसे लेकर निवेशकों से अफसरों ने संपर्क शुरू किया है। अब तक कितना काम धरातल पर हो चुका है, इसका पता लगाया जा रहा है। सत्यापन के दौरान जब कई उद्यमों में कोई कार्य न होना पाया गया तो उद्योग के अधिकारियों ने संबंधित उद्यमियों से संपर्क साधा। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इन उद्यमियों का उद्यम स्थापित कराने की कोई मंशा है ही नहीं। जिस उम्मीद से यह निवेश को तैयार हुए थे वह महज ऋण सुविधाएं व सरकार की ओर से मिलने वाले जमीन की थी। विभाग की मानें तो यह निवेशक केवल सरकार के बल पर अपना उद्यम स्थापित करने की मंशा पाले थे। जबकि नियमानुसार ऋण के लिए उद्यमी को अपने पास से भी धन खर्च करना है। उपायुक्त उद्योग अभय सुमन की मानें तो सत्यापन में करीब 11 सौ करोड़ का निवेश करने के लिए सहमति देने वाले उद्यमियों का एमयूओ बोगस था। इनके पास न तो कोई तैयारी थी और न ही जमीन। इन्हें केवल सरकार का सहारा था। ऐसे में जब तैयारी की बात की गई तो इन लोगों ने किसी भी उद्यम को लगाने से मना कर दिया है। यहां तक की बार-बार फोन करने के बाद वह उद्योग लगाने से पल्ला झाड़ रहे है। इसमें गुजरात और नोएडा की कंपनियां हैं, जो शुरू में जिले में रोजगार का सब्जबाग दिखा रही थी।
यह उद्यम होंगे स्थापित
कृषि-2.5 करोड़
पशुपालन विभाग- 200 करोड़
सोलर उर्जा- 222 करोड़
डेयरी- 300 करोड़
टूरिज्म विभाग-122 करोड़
हास्पिटल- 500 करोड़
वन- 200 करोड़
इन कार्यों के उद्यमियों ने झाड़ा पल्ला
-गुजरात की गैस पाइप लाइन कंपनी- 700 करोड़ -सोलर एनर्जी नोएडा- 126 करोड़
- एग्रीटेक- 130 करोड़
- पावर एनर्जी प्लांट- 124 करोड़
यह है नियम
- उद्यम स्थापित करने के लिए कम से कम दस प्रतिशत पूंजी होनी चाहिए
- उद्यमी के पास व्यावसायिक जमीन होनी चाहिए, जमीन के आधार पर ही ऋण मिलता है
- प्रोजेक्ट तैयार करने के बाद बैंक जमीन की कीमत की 70 प्रतिशत तक ऋण देती है
- पूंजी के अनुपात में बैंक की ओर से 20 प्रतिशत या अधिकतम चार करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है
- महिला उद्यमी को सात तो पांच प्रतिशत पुरुष उद्यमी को लाभ मिलता है
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कई उद्यमी तो अब फोन ही नहीं उठाते हैं
जो बड़े उद्यमी कुछ थे, उन्हें बार-बार फोन करने पर अब उठाते ही नहीं हैं। कुछ तो ऐसे हैं, जो जमीन मांग रहे हैं। 296 प्रस्तावों में आए सबसे अधिक बकरी पालन का है। अब अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर उद्योग स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। करीब 1100 करोड़ के प्रस्ताव बोगस की श्रेणी में पाए गए हैं। जिनकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्हें रेड श्रेणी में रखा गया है। ऐसे उद्यमियों की संख्या करीब 20 है।
अभय सुमन, उपायुक्त उद्योग
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प्रभारी डीएम बोले-
जमीन और ऋण के लालच में गुजरात सहित अन्य बड़े शहरों के उद्यमियों ने प्रस्ताव दिया। सत्यापन का काम किया जा रहा है, जो उद्यमी पल्ला झाड़ रहे हैं, उनका प्रस्ताव निरस्त किया जाएगा। विभिन्न विभागों में अटके प्रस्तावों को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा।
रवींद्र कुमार, प्रभारी डीएम