नैतिकता, ईमानदारी और सादगी के जीवंत प्रतीक थे रामछबीला
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। कटइलवा मुक्तिपथ स्थित सरयू नदी तट पर शनिवार को देवरिया सदर के पूर्व विधायक और कतरारी निवासी स्व. रामछबीला मिश्र का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। भावुक क्षण में लोगों की आंखें डबडबा गईं। उनके अंतिम संस्कार में दलीय सीमाएं टूट गई थीं। जबकि व्यापारी, समाजसेवी आदि लोग भी शामिल थे।
पूर्व विधायक के बड़े पुत्र अमित मिश्र ने उन्हें मुखाग्नि दी। लोगों का कहना था कि स्व. रामछबीला मिश्र नैतिकता, ईमानदारी और सादगी के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने लोगों के हित में कभी भी अपने वसूलों से समझौता नहीं किया था। क्षेत्राधिकारी आदित्य कुमार गौतम ने गारद के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी।
इस अवसर पर तहसीलदार अरुण कुमार, सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव, हृदयानंद जायसवाल, नीरज शाही, पिंटू जायसवाल, संजय सिंह, त्रिभुवन, रवींद्र तिवारी, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, रविप्रकाश मिश्र, अनिल मिश्र, नंदलाल जायसवाल, शिवाकांत मिश्र, बबलू मिश्र, संजय मिश्र, सनद कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे।
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छात्र जीवन में सीखा था राजनीतिक ककहरा, युवा तुर्क के नाम से थे मशहूर
बरहज। कतरारी गांव निवासी और देवरिया सदर के पूर्व विधायक स्व. रामछबीला मिश्र ने छात्र जीवन में राजनीतिक ककहरा सीखा था। वह देवरिया में युवा तुर्क के नाम से मशहूर थे। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है।
कतरारी गांव निवासी किसान स्व. सीता मिश्र के पांच पुत्राें में स्व. रामछबीला चौथे नंबर के थे। परिजनों के अनुसार, एसएसबीएल इंटर काॅलेज से इंटरमीडिएट, बीआरडी पीजी काॅलेज देवरिया से स्नातक, जबकि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर से उन्होंने एलएलबी किया था। वह इंटर की पढ़ाई के दौरान महामंत्री चुने गए थे। यहीं से इनका राजनीतिक सफर शुरू हो गया था। बीआरडी डिग्री काॅलेज और दीदउ में भी महामंत्री निर्वाचित हुए थे।
स्व.चंद्रशेखर सिंह की पार्टी जनता दल से उन्होंने 1980, 1984 और 1989 चुनाव लड़ा था। उन्होंने 1989 में विजय हासिल की थी। इमरजेंसी के दौरान देवरिया जेल में निरुद्ध रहे। राममनोहर लोहिया, चंद्रशेखर सिंह, मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी रहे पूर्व विधायक और लोकतंत्र रक्षक सेनानी रामछबीला मिश्र इमरजेंसी के दौरान देवरिया जेल में निरुद्ध किए गए थे।
लोग बताते हैं कि राममनोहर लोहिया पर चाकू से हमले के दौरान पूर्व विधायक रामछबीला ने अपने बड़े भाई जयशंकर मिश्र के साथ उस हमले को नाकाम कर दिया था।