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तटबंधों पर बढ़ाएं पेट्रोलिंग, बाढ़ पीड़ितों को मुहैया कराएं राहत सामग्री

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देवरिया पुलिस लाइन सभागार में बाढ़ सम्बंधित कार्यो की समीक्षा बैठक करते प्रदेश सरकार के कैबिनेट - फोटो : DEORIA
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तटबंधों पर बढ़ाएं पेट्रोलिंग, बाढ़ पीड़ितों को मुहैया कराएं राहत सामग्री
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मंत्रियों ने बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा बैठक की, बरहज तहसील में मदद नहीं पहुंचने पर जताई नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पुलिस लाइंस सभागार में शुुक्रवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के मंत्री अनिल राजभर और राज्यमंत्री जलशक्ति विभाग बलदेव सिंह ओलख ने समीक्षा बैठक की। अफसरों के अलावा जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे और अपने पक्ष रखे।
मंत्री राजभर ने कहा कि बाढ़ से बचाव में किसी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से तटबंधों पर 24 घंटे पेट्रोलिंग की जाए। संवेदनशील तटबंधों पर पेट्रोलिंग के अलावा जेनरेटर की व्यवस्था की जाए। हालात से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है। सीएम स्वयं गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल ने पानी छोड़ा है। इससे थोड़ी समस्या आई है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। बाढ़ से किसानों की फसल का जो नुकसान हुआ है उसका मुआवजा सरकार देगी। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में राहत सामग्री, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा पशुओं को चारा उपलब्ध कराने के निर्देशदिए। बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें और प्रशासनिक अफसर जमे रहेे। मंत्री ने कहा कि एनडीआरएफ की ओर से होमगार्ड, पीआरडी के जवानों को भी प्रशिक्षित किया गया है। इनका भी सहयोग लिया जाए। डीएम अमित किशोर ने बाढ़ की तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि जिले के विशुनपुर देवार, परसिया देवार व भदिला देवार तथा कटइलवा पानी से घिर गए हैं। विशुनपुर एवं परसिया देवार सरयू नदी के उस पार मऊ की सीमा से जुड़ा हुआ है, यदि इन गांवों को मऊ जिले में शामिल कर लिया जाए तो सुगम होगा। इस पर अपर प्रमुख सचिव सिंचाईं एवं जलशक्ति टी वेंकटेश ने कहा कि यदि यह मामला राजस्व विभाग को प्रस्तावित किया गया हो तो उसकी कॉपी उपलब्ध कराई जाए ताकि शासन स्तर पर पहल की जाए। रुद्रपुर, बरहज तहसील के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया गया। सलेमुपर विधायक काली प्रसाद ने पिंडी, खरवनिया, चुरिया, बंधों पर हो रही कटान रोकने की मांग की। इस दौरान सदर विधायक जन्मेजय सिंह, जिलाध्यक्ष अंतर्यामी सिंह, अपर मुख्य सचिव सिंचाई टी वेंकटेश, एसपी डॉ. श्रीपति मिश्र, एडीएम वित्त एवं राजस्व उमेश कुमार मंगला, एएसपी शिष्यपाल सिंह, सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास साठे, बाढ़ खंड एक्सईएन नरेंद्र जड़िया आदि मौजूद रहे।
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नदियों का घटने लगा जलस्तर, कटान तेज
तुर्तीपार से चुरिया तटबंध पर तेज हो रही कटान, दहशत में लोग
अफसरों पर विधायक ने कटान रोकने में लापरवाही का लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। नदियों का पानी बृहस्पतिवार की रात से कम होने लगा है। पानी कम होने से कटान तेज हो गई है। नदी में पानी घटने से बाढ़ खंड विभाग के लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं, आठ बाढ़ चौकियों से तटबंधों की पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है।
गोर्रा, सरयू, राप्ती और छोटी गंडक नदी लाल निशान को पार कर गई थीं। तटवर्ती इलाके के गई गांवों में बाढ़ का पानी भी घुस गया है। घर छोड़कर लोग तटबंधों पर शरण लिए हैं। प्रशासन की ओर बाढ़ पीड़ितों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। कागज में नाव की व्यवस्था कर जिम्मेदार अपना पीठ थपथपा रहे हैं। परसिया देवार, विशुनपुर देवार, कटईलवा के लोग तटबंधों पर रात गुजार रहे हैं। इनके पास किसी भी तरह की रात नहीं पहुंच रही है। 1998 में सरयू का जलस्तर 68.62 मीटर पर पहुंचा था और बाढ़ की विभीषका लोगों को झेलनी पड़ी थी। बृहस्पतिवार को दोपहर तक सरयू का जलस्तर 68.20 मीटर तक पहुंच गया था। गोर्रा, राप्ती, सरयू और छोटी गंडक नदी का जलस्तर कम होने लगा है। तुर्तीपार से चुरिया बंधे तक नदी तेजी से कटान कर रही है। भागलपुर, देवसिया गांव के समीप भी कटान हो रही है। बाढ़ की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में सलेमपुर विधायक काली प्रसाद ने पुरजोर तरीके से इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि अफसर बाढ़ प्रभावित गांवों की निगरानी सिर्फ कागज में कर रहे हैं। क्षेत्र में कम जा रहे हैं, जो सरकार की मंशा के खिलाफ है। इस बाबत बाढ़ खंड के एक्सईएन नरेंद्र जड़िया ने बताया कि नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। इसकी वजह से कटान हो रही है। कटान को रोकने के लिए इंतजाम तटबंधों पर किया गया है। रुद्रपुर क्षेत्र के पांडेयमांझा-जोगिया, भुसवल-पिड़रा, पिड़रा-करनपुर और पचलड़ी तटबंध पर खास नजर रखी जा रही है।
नदियों का आज का जलस्तर
नदी लाल निशान प्रवाहित
सरयू 66.50 मीटर 68 मीटर
राप्ती 70.50 मीटर 70.85 मीटर
गोरा 70.50 मीटर 71.10 मीटर
छोटी गंडक 63.80 मीटर 63.95 मीटर
...फोटो समाचार
कम हो रहा भागलपुर में सरयू नदी का जलस्तर
तुर्तीपार में नदी अब भी खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर बह रही
संवाद न्यूज एजेंसी
भागलपुर। खतरे के निशान से ऊपर बहने वाली सरयू नदी के तेवर अब भी तल्ख हैं। नदी का जलस्तर 24 घंटे से धीरे-धीरे कम हो रहा है। हालांकि, तटीय इलाकों के लोगों में दहशत बरकरार है। लोगों का कहना है कि नदी में बाढ़ अगस्त माह के अंतिम हफ्ते में आती थी। लेकिन इस साल जुलाई महीने में ही बाढ़ आ जाने से आगे भी खतरे की आशंका बरकरार है।
क्षेत्र में नदी का जलस्तर भले ही कम हो रहा हो, लेकिन अभी भी बाढ़ आने से इन्कार नहीं किया जा सकता। तुर्तीपार रेगुलेटर पर नदी शुक्रवार की दोपहर 65 मीटर 60 सेंटीमीटर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से एक मीटर 30 सेंटीमीटर ऊपर है। रामजानकी मार्ग और भागलपुर-मईल मार्ग पर नदी का दबाव अब भी बना हुआ है। तटीय इलाकों के लोगों की सैकड़ों एकड़ धान, मक्के, अरहर की फसल बर्बाद हो चुकी है। अब तो तटवर्ती लोगों को भोजन की समस्या सताने लगी है। लोगों का कहना है कि शासन और प्रशासन के लोग तटवर्ती किसानों की कोई खोज खबर नहीं ले रहे हैं। इससे किसान भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। इस बाबत एसडीएम बरहज सुनील कुमार सिंह ने बताया कि नदी का पानी कम हो रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद की जाएगी।
सरयू के जलस्तर में 15 सेमी की आई कमी
बरहज। सरयू नदी में पिछले 12 घंटे में 15 सेमी की नरमी आई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 66.50 से 68.05 मीटर पर बह रहा है। जलस्तर में नरमी आने से तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत महसूस की है। जबकि दहशत बरकरार है। नदी में बाढ़ आने से सैकड़ों एकड़ भूमि जलमग्न हो गई है। चारों ओर पानी ही पानी हो गया है। बाढ़ पीड़ितों की सहूलियत के लिए प्रशासन ने भदिला प्रथम, मईल खादर और परसियां-विशुनपुर देवार में करीब 30 नाव लगाया है। बंधों पर जीवन-यापन करने वाले शरणार्थियों के लिए लंच पैकेट मुहैया कराए गए। एसडीएम सुनील कुमार सिंह ने बताया कि नदी के जलस्तर में नरमी आई है। बाढ़ पर नजर रखने और पीड़ितों के लिए तहसीलदार वंशराज राम, नायब तहसीलदार जितेंद्र सिंह, कमलाकांत भाष्कर के जरिए राहत सामग्री मुहैया कराई जा रही है।
फोटो समाचार
सैलाब और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
रामजानकी मार्ग और परसियां-विशुनपुर देवार बंधे पर रात काट रहे लोग, भोजन के लाले
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज/कपरवार। सरयू नदी में आफत का सैैलाब उमड़ आया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर पांच सेमी ऊपर बह रहा है। विस्थापित कोल खास और दियारा क्षेत्र के परसियां-विशुनपुर देवार के करीब 27 टोलों में बाढ़ का पानी घुस गया है। नदी में उमड़ रहे सैलाब और रुक-रुक कर हो रही बारिश से बाढ़ पीड़ित परेशान हो रहे है। लोग रामजानकी मार्ग और दियारा के बंधे पर टेंट में शरण लिए हैं। इनके सामने खाने के भी लाले पड़े हुए हैं।
2007 से लेकर 2014 तक नदी के कटान में कुरह परसियां और गोरखपुर जनपद का कोलखास का अस्तित्व समाप्त हो गया था। प्रशासन ने कोलखास विस्थापितों को उग्रसेन सेतु के निकट नई बस्ती में बसाया। जहां करीब 80-85 घरों में लोग निवास करते हैं। बाढ़ आने पर सभी रामजानकी मार्ग पर टेंट में शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीड़ित अपनी व्यथा कहते हुए फफक पड़ रहे हैं। 60 वर्षीया बुधिया देवी, बरफी, इंदू, पानमती और सुनीता का कहना है कि नई बस्ती में कई वर्षों से रह रहे हैं। प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में सड़क पर आशियाना बनाना मजबूरी है। जबकि रूखा-सूखा खाकर हिंसक पशुओं के भय के कारण रतजगा करने पर विवश हैं। लोग बच्चों आदि को रिश्तेदारी में भेज दिए हैं। दियारा क्षेत्र के जरलहवा, बरमहवा, यादव बस्ती, दलित बस्ती, नुरुल्लाहपुर आदि टोलों के लोगों ने बंधों पर शरण ली है। नीचे बाढ़ और ऊपर से बारिश का पानी से परेशानी बढ़ गई है।
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फोटो समाचार
सरयू के उफनाने से गांवों में पहुंचे दो बारहसिंघा, एक की मौत
बरहज/भलुअनी। सरयू नदी में उफान आने से दियारा क्षेत्र में रहने वाले जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। पलियां गांव के खाली टोला और भलुअनी के सिंहपुर में भटककर दो बारहसिंघा पहुंच गए। पुलिस ने बारहसिंघा को वन विभाग को सौंप दिया। इसमें एक की मौत हो गई। शुक्रवार को दोपहर बाद पलियां के खाली टोला में एक बारहसिंघा पहुंच गए । जिसे देखकर ग्रामीणों ने उसे पकड़ने की कोशिश करने लगे। काफी मशक्कत के बाद उसे काबू में किया जा सका। सूचना पर पहुंचे एसआई रामगिरीश चौहान ने उसे वन विभाग को सौंप दिया। दूसरी ओर भलुअनी थाना क्षेत्र के सिंहपुर में पहुंचे बारहसिंघा को कुछ जानवरों ने दौड़ा लिया। जबकि वह गांव की एक पोखरी में गिर गया। लोगों ने बारहसिंघा को पोखरी से बाहर निकाला। लेकिन उसकी मौत हो गई थी। क्षेत्रीय वन अधिकारी राणा प्रताप सिंह ने बताया कि पकड़े गए बारहसिंघा का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया है। जिसे जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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