देवरिया। गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के नीचे बनाए गए मजार मामले में बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। मजार को बिना मानचित्र स्वीकृति के बनाए जाने का आरोप है। इस मामले में विनियमित क्षेत्र नियत प्राधिकारी एसडीएम सदर के कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है।
विनियमित क्षेत्र नियत प्राधिकारी एसडीएम सदर की कोर्ट में मंगलवार को मजार पक्ष के अधिवक्ता ने अपनी आपत्ति दाखिल कर दिया पर लोक निर्माण विभाग ने अपनी रिपोर्ट अब तक कोर्ट में दाखिल नहीं किया है। कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग से मजार की जमीन व भवन के मामले में अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। वहीं आरबीओ जेई अखिलेश ओझा की ओर से कोर्ट को बताया गया है कि मजार के नक्शे का मानचित्र वर्ष 1993 में निरस्त कर दिया गया था।
इसके बाद 2022 में दोबारा नक्शा स्वीकृत कराने का आवेदन किया गया था। इससे जुड़े एएसडीएम सदर के कोर्ट में भूमि स्वामित्व संबंधी वाद में एएसडीएम ने अवधेश निगम की कोर्ट ने इसे बंजर सरकारी जमीन घोषित कर दिया था। इसके बाद इस जमीन पर सरकार का नाम दर्ज कर दिया गया था। अब मजार के नक्शा से संबंधित वाद नियत प्राधिकारी के कोर्ट में लंबित है। इस पर दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय लिया जाना है।