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विजय मौर्य लोगों के जेहन में जिंदा, देश के लिए शहीद होने पर गर्व

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विजय मौर्य लोगों के जेहन में जिंदा, देश के लिए शहीद होने पर गर्व
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भटनी (देवरिया)। साल 2019 के फरवरी महीने की 14 तारीख ने देश को झकझोर कर रख दिया था। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देवरिया के लाल विजय कुमार मौर्य भी शहीद हो गए थे। जिले के छपिया जयदेव गांव निवासी शहीद विजय मौर्य की दूसरी बरसी पर लोगों की आंखों से आंसू छलक आए। वह लोगों के जेहन में जिंदा हैं।
शहीद विजय मौर्य ने स्नातक तक की पढ़ाई करने के बाद 2008 में सीआरपीएफ में कांस्टेबल के पद पर नौकरी ज्वाइन किया था। उनके अंदर बचपन से देश सेवा की ललक थी, इसी कारण वह बड़े होकर सेना में शामिल हो गए। शहीद विजय की चार साल की बेटी आराध्या है। पत्नी विजयलक्ष्मी को कलेक्ट्रेट कार्यालय में लिपिक की नौकरी मिल गई है। उनका कहना है कि मुझे पति की मौत का गम तो बहुत है। साथ ही अपने पति पर गर्व भी है कि वह देश के लिए शहीद हुए। हमारी बेटी भी बड़ी होकर अपने पिता की तरह देश की सेवा करेगी। विजयलक्ष्मी ने कहा कि वह जब भी वह दुखी होती हैं तो गांव में अपने पति की याद में बने शहीद पार्क में आकर पति को देख लेती हूं, मन को बहुत संतोष मिलता है। पिता रामायण सिंह मौर्य ने कहा कि आज भी छपिया गांव में शहीद की यादें लोगों के जेहन में जिंदा है। कोई ऐसा दिन नहीं है जब शहीद विजय की याद नहीं आती है।
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हम रहे न रहे यह देश रहे
रत्नेश यादव/ संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। देश के लिए मर मिटना स्वीकार है हमें, अखंड भारत के सपने का जुनून है हमेें... कुछ ऐसा ही जज्बा है देवभूमि के वीर जवानों के अंदर। तभी तो शहादत के हर किस्से में देवरिया का नाम शुमार है। बात चाहे पुलवामा के आतंकी हमले की हो या समय-समय पर पाक के सीजफायर के उल्लंघन की। देश की सुरक्षा पर जब भी संकट आया, तब वीर सपूतों ने अपनी जान देकर जिले की माटी की लाज रखी है। तिरंगा ओढ़कर जवान खुद तो अमर हुए ही देवरिया का नाम भी ऊंचा कर गए। पिछले पांच वर्ष में जिले के तीन जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए शहादत दी है। इनके घरवालों को अपनों को खोने का गम तो है, लेकिन उनकी शहादत को याद कर आज भी उनका मस्तक फक्र से ऊंचा हो जाता है। मई 2017 की रात दहशतगर्दों ने आतंकी घटना को अंजाम दिया। पाक सेना ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए सीमा पर गोलीबारी की। इसमें भाटपाररानी के टीकमपार निवासी प्रेमसागर यादव शहीद हो गए थे। आतंकवादियों ने उनके शव को क्षत-विक्षत कर दिया गया था। कई दिनों की मशक्कत के बाद शव घर पहुंचा था। प्रेमसागर बीएसएफ में हेड कांस्टेबल थे। वह जम्मू के सांबा सेक्टर में तैनात थे। अभी मामला शांत नहीं हुआ था कि दो जून 2018 को सीमा पार से हुए हमले में बांसपार बैदा के सत्यनारायण यादव ने शहादत दी। जम्मू के अखनूर सेक्टर में बीएसएफ के 33वीं बटालियन में एएसआई पद पर तैनात थे। कारगिल युद्ध के समय भी वह सीमा पर तैनात रहे। तब भी बहादुरी से लड़े थे। उनके दाएं कंधे पर गोली लगी थी। उनकी बहादुरी के कारण ही उन्हें हेड कांस्टेबल से एएसआई के पद पर पदोन्नति दी गई थी। इसके बाद 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में भटनी के छपिया जगदेव गांव विजय मौर्य ने अपनी शहादत दी थी। छपिया जगदेव निवासी रामायण मौर्य के सबसे छोटे बेटे विजय मौर्य वर्ष 2009 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। पुलवामा हमले के समय उनकी पोस्टिंग जम्मू के ही बारामूला सेक्टर में थी। जम्मू से श्रीनगर में शिफ्टिंग के दौरान वह जिस वाहन में सवार थे, उसे आतंकियों ने विस्फोट से उड़ा दिया। घटना के बाद से ही विजय लापता थे। जम्मू में ही सीआरपीएफ में तैनात चचेरे भाई राजेश कुमार मौर्य ने शहादत की सूचना गांववालों को दी थी, लेकिन सीआरपीएफ मुख्यालय से कोई अधिकृत सूचना नहीं आने से उम्मीद बंधी थी कि विजय के जीवित होने की सूचना आएगी। 15 फरवरी की सुबह शहादत की सूचना लेकर अफसर गांव पहुंचे तो परिजन दहाड़े मारने लगे। घर में मौजूद पत्नी विजयलक्ष्मी अपने चार साल की बेटी आराध्या को गोद में लेकर फफक रही थीं तो पिता रामायण मौर्य की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। शहीद के घर सैकड़ों की तादाद में लोग ढांढस बंधाने पहुंचे थे, जहां मौजूद लोग घरवालों का हालत देख खुद को संभाल नहीं पाए रहे थे। वो भी एक दिन था, जिसको याद कर लोग चर्चा कर रहे थे।
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