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Deoria News: अभी नहीं चेते तो इस बरसात में भी डूब जाएंगे कई मोहल्ले

Thu, 18 May 2023 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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गायत्रीपुरम मुहल्ले में बारिश के समय घुटने भर लगता है पानी।संवाद
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बरसात में हर साल जलभराव का दंश झेलती है 20 हजार की आबादी, छह सौ से अधिक परिवारों का होता है पलायन
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- शहर के आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों में थोड़ी सी बारिश में भी सड़कों पर लग जाता है पानी
-नालियों का गंदा पानी घरों में घुसने से शहरवासियों के लिए हो जाती है नारकीय स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बाबू एक महीना में बरसात शुरू हो जाई...तब फिर घरवे में कैद होके रहि जाएक पड़ी। बरसात के दिन में दू से तीन फिट पानी सड़की पर लगी जाला...ऐसे में अइले जइले में नरके से गुजरेक पड़ेला। यह पीड़ा है शहर के अलीनगर के यूसुफ, रहमान, शहीदनगर के पीर मोहम्मद, अनूप पांडेय सहित आधा दर्जन से अधिक मोहल्लेवासियों की। दरअसल बरसात में हर साल शहर की करीब 20 हजार आबादी जलभराव का दंश झेलती है। इतना ही नहीं छह सौ से अधिक परिवार घर के आसपास पानी भर जाने के कारण पलायन को मजबूर हो जाते हैं। जो रहते भी हैं, वे चचरी के पुल के सहारे जलभाराव वाले रास्ते से गुजरने को अपनी नियति मान चुके हैं। जलभराव की आशंका से सहमे शहरवासियों का कहना है कि अगर समय रहते इस बार भी कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया तो फिर से उनकी दुर्गति होनी तय है।
पिछले साल बरसात में लोग रोजमर्रा के सामानों के लिए चचरी पुल व ट्यूब का सहारा लेते थे। घर में सांप, बिच्छुओं का बसेरा हो गया था। हर साल हो रही चार माह की दुश्वारी को याद कर लोग जिम्मेदारों को कोस रहे हैं। उनका कहना है कि सात साल से उन्हें आश्वासन की घुट्टी पिलाई जा रही है, लेकिन जलनिकासी का समुचित इंतजाम नहीं किया जा रहा, जो 44 करोड़ का बजट मिला उसे शहर के मध्य भाग में ही खपा दिया गया है।
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यहां होती है सर्वाधिक दिक्कत
रामगुलाम टोला पूर्वी, शांति नगर महुआबारी, पिड़रा, गायत्रीपूरम, अली नगर, शहीद नगर, चटनी गड़ही मोहल्ला, मंगलमपूरम फेज एक और दो में जल निकासी का इंतजाम नहीं हो पाया है। इसमें कुछ नई कालोनियां बसी हैं तो कुछ दशकों पुरानी हैं। 15 जून के बाद मानसून आते ही इन मोहल्ले के लोगों की धड़कन बढ़ जाती है। क्योंकि यह मोहल्लेवासी बीते सात साल से बरसात में जलभराव का दंश झेल रहे हैं। किसी सड़क पर कमर भर तो कहीं कंधे भर पानी जमा हो जाता है। वर्ष 2018 में अली नगर, शहीद नगर, शांति नगर महुआबारी में बाढ़ जैसे हालात थे। एनडीआरएफ की मदद से मोहल्ले के लोगों को रेस्क्यू किया गया था। करीब चार सौ परिवार पलायन को मजबूर हुए थे। बाद के दिनों में भी हर साल कभी कम कभी ज्यादा इस तरह की नौबत आती रहती है।

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जलभराव का यह है कारण
जलभराव से प्रभावित मोहल्ले कुर्ना नाले के किनारे हैं। कुर्ना का ऊंचा बांध होने के चलते बारिश का पानी मोहल्लों में जमा हो जाता है। नाली का निर्माण नहीं होने के कारण जलनिकासी नहीं हो पाती है। अलीनगर में कुर्ना नाले का अतिक्रमण होने व नियमित सफाई नहीं होने के चलते जलनिकासी अवरोध उत्पन्न होता है।
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ऐसे मिलेगी जलभराव से निजात
सेवानिवृत्त इंजीनियर दिनेश चौरसिया ने बताया कि सीमावर्ती मोहल्लों की सभी सड़कों के किनारे नाली निर्माण कराया जाए। सभी का पानी मुख्य नाले के माध्यम से कुर्ना में गिराया जाए। नालियों की नियमित सफाई होती रहे। तब जाकर बरसात का पानी सड़कों, गलियों से आसानी से निकल जाएगा। इतना काम होने के बाद से शहरवासियों को जलभराव की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन कॉलोनियों की सड़कों पर पानी लगता है, वहां नालियां गहरी कराकर उनकी नियमित सफाई हो तो जलभराव से छुटकारा मिलेगा।

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टूटी सड़कों की नहीं हुई मरम्मत
इन मोहल्लों में जलभराव से जो सड़कें टूटी हैं, उनकी मरम्मत तक नहीं हो पाई हैं। पिड़रा चौराहा, गायत्रीपूरम-पिड़रा मार्ग से उत्तर की ओर जाने वाली सड़क बह गई है।

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मिलता है आश्वासन, नहीं होते काम
जलभराव से प्रभावित मोहल्लेवासियों के जख्म पर मरहम लगाने हर बार जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं। बरसात बीतते ही जलनिकासी के लिए इंतजाम कराने का आश्वासन देते हैं, दुश्वारी कम होते ही सबकुछ भूल जाते हैं। आश्वासन का यह सिलसिला सात साल से चल रहा है।
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हर साल प्रभावित होती है दो हजार बच्चों की पढ़ाई
जलभराव से प्रभावित मोहल्लों में तीन स्कूल ऐसे हैं, जो आवागमन ठप होने के कारण अक्सर बंद हो जाते हैं। इसके अलावा शहीद नगर स्थित एक आवासीय मदरसा भी खाली हो जाता है। अधिकांश परिवार अपने गांव चले जाते हैं तो कुछ शहर के अन्य हिस्सों में किराए पर रहने को मजबूर होते हैं। इन परिवारों समेत करीब दो हजार बच्चों की पढ़ाई बरसात में जलभराव के कारण प्रभावित होती है।

गायत्रीपुरम पिड़रा रोड से उत्तर की ओर जाने वाली सड़क जर्जर बरसात में पानी के बहाव से टूट गई है। नाली का भी इंतजाम नहीं है। सड़की मरम्मत नहीं होने से आवागमन में परेशानी हो रही है। जबतक मोहल्ले में जल निकासी का इंतजाम नहीं होगा। हर साल दुश्वारी बरकरार रहेगी। -करुणेश्वर सिंह, गायत्रीपुरम कालोनी
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हम सभी के लिए साल के चार महीने दुर्दिन होते हैं। पानी घरों में घुसने से राशन, विस्तर आदि सड़ जाते हैं। आवाजाही के लिए चंदा जुटाकर चचरी पुल बनाना पड़ता है।
- मीरा देवी विश्वकर्मा, रामगुलाम टोला पूर्वी
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हर साल बरसात के दिनों में घरों में पानी घुस जाता है। मोहल्ले के युवा ट्यूब के सहारे आवाजाही कर राजमर्रा के सामान लाते हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो जाती है। नगर प्रशासन इस समस्या का स्थाई निदान नहीं करा रहा। - खैला शेख, शांति नगर महुआबारी -
जुलाई से अगस्त तक घरों में पानी घुस जाता है। पानी कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों का खतरा रहता है। सांप, बिच्छू भी घरों में आ जाते हैं। इसके चलते हमें चार महीने पलायन करना पड़ता है। सैरा खातून, शांति नगर
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वर्जन
बजट की उपलब्धता के अनुसार सभी वार्डों में सड़क और नाली निर्माण के कार्य कराए जाते हैं। सीमावर्ती मोहल्लों में हर साल जलभराव की समस्या रहती है। शासन से बजट उपलब्ध होने पर स्थायी समाधान किया जाएगा। - रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद देवरिया
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