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मनरेगा : बिना काम के भुगतान पर आयुक्त ग्राम्य विकास ने मांगी आख्या

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डीएम को लिखा पत्र, आरोपी बीडीओ बोले- मेरे खिलाफ साजिश रची गई
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अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बनकटा विकास खंड में बिना काम कराए और पूर्व में हुए कार्यों का दोबारा भुगतान होने के मामले का खुलासा ‘अमर उजाला’ द्वारा किए जाने के बाद प्रदेश के आयुक्त ग्राम्य विकास के. रवींद्र नायक ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने देवरिया के डीएम/ जिला कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा को पत्र भेजकर आख्या मांगी है।
आख्या तलब होने के बाद बनकटा के तत्कालीन और वर्तमान में भलुअनी के बीडीओ से चार्ज डीएम ने मंगलवार को वापस ले लिया। सूत्रों के अनुसार, देवरिया जिले में हुए कार्यों की टीएसी जांच शासन करा सकता है। इसकी भनक मिलते ही जिले के सभी खंड विकास अधिकारी अपनी-अपनी पत्रावलियां ठीक करने में जुट गए हैं।
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गड़बड़ी के दौरान बनकटा के खंड विकास अधिकारी का दायित्व ग्राम्य विकास अभिकरण के एई चंद्रभान सिंह के पास था। आरोप है कि 31 मार्च को ग्राम प्रधानों एवं सेक्रेट्री से मिलकर बिना कराए ही कार्यों का भुगतान करा दिया गया। इसमें पांच से अधिक ऐसे निर्माण कार्य हैं जिसका निर्माण दो वर्ष पहले हो चुका है।
इसी बीच एई चंद्रभान सिंह का स्थानांतरण भलुअनी ब्लॉक के लिए हो गया। एक अप्रैल 2020 को डिप्टी कलेक्टर सौरभ सिंह बनकटा में खंड विकास अधिकारी का चार्ज लिया। चार्ज देने में हीला हवाली हुई तो सौरभ सिंह को कुछ शक हुआ। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों की जांच शुरू करा दी। जांच में तकरीबन तीन करोड़ 59 लाख भुगतान होने की बात सामने आई। आनन- फानन में उनके प्रयास से एक करोड़ 89 लाख का भुगतान रोक दिया गया। इस बीच एक करोड़ 70 लाख का भुगतान 42 ग्राम पंचायतों में हो चुका था। इस पूरे मामले को ‘अमर उजाला’ ने 21 अप्रैल के अंक में प्रथम पेज पर ‘मनरेगा : बिना काम के ही 1.70 करोड़ का भुगतान’ शीर्षक से प्रकाशित किया। आयुक्त ग्राम्य विकास ने इसका संज्ञान लेते हुए पूरे मामले में डीएम से आख्या तलब की है।
वहीं आरोपी खंड विकास अधिकारी और एई डीआरडीए चंद्रभान सिंह का कहना है कि मेरे खिलाफ साजिश रची गई है। निष्पक्ष जांच दूसरी टीम से कराई जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ सकती है। कोई घोटाला नहीं हुआ है।
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बनकटा विकास खंड का मामला गंभीर हैं। पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम देवरिया से आख्या मांगी गई है। आख्या प्राप्त होने के बाद टीएसी जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- के. रवींद्र नायक, आयुक्त ग्राम्य विकास, लखनऊ
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