संवाद न्यूज एजेंसी
मईल। देवों की धरती देवरिया जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर दक्षिणांचल के अंतिम छोर पर सरयू नदी तट पर अपने सिद्धी से तपो भूमि बनाने वाले महायोगी देवरहा बाबा अपने आप में रहस्य थे।
बाबा ठंंडी, गर्मी, बरसात में बिना वस्त्र के एक मृगछाला पहनकर 12 फीट छोटे से काठ के मंच पर लोगों को दर्शन देते थे।
पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह, कमलापति त्रिपाठी, बिंदेश्वरी दुबे, जगरनाथ मिश्र, मुलायम सिंह यादव, राजनाथ सिंह, बूटा सिंह सहित कई दिग्गज नेता, अभिनेता और प्रशासनिक अधिकारी आश्रम पर पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद लिया था।
अब जबकि देवरहा बाबा ब्रह्मलीन हो गए हैं, उसके बावजूद आश्रम का महत्व कम नहीं हुआ है।आश्रम पर समय-समय पर देश के कोने-कोने से भक्तों की भीड़ लगी रहती है और जो बाबा को सच्चे मन से याद करते हैं उन भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।
देवरहा बाबा के जन्म को लेकर आज भी रहस्य बना हुआ है। बाबा के भक्त पांच सौ वर्ष से लेकर ढाई सौ वर्ष तक जिंदा होने का दावा करते हैं।
बाबा ने सिद्ध हठ योगी के रूप में ख्याति अर्जित की थी। उनके भक्त उनके पैरों के अंगूठे की चरण रज लेकर धन्य हो जाते थे।
बाबा भक्तों के मन की बात बिना बताए ही जान जाते थे। बाबा योग विद्या से नदी के पानी पर चलना जानते थे। बाबा हमेशा गो पालन, गो सेवा का संदेश देते थे। उन्होंने कभी अन्न का सेवन नहीं किया, बल्कि वह हमेशा दूध, दही और शहद का इस्तेमाल करते थे।
जीवन के अंतिम पड़ाव में वह वृंदावन में सरयू तट पर चले गए। उन्होंने 1990 में योगिनी एकादशी पर 19 जून को अपना शरीर त्याग दिया। पीठाधीश्वर श्याम सुंदर दास ने बताया कि इस साल भी देवरहा बाबा आश्रम पर उनकी 35वीं पुण्यतिथि योगिनी एकादशी 21 जून को मनाई जाएगी।