सुधीर श्रीवास्तव/सुनील सिंह
देवरिया। लंबे वक्त बाद यूपी को सीएम पूर्वांचल से मिला है। बीर बहादुर सिंह के बाद महंत आदित्यनाथ सूबे की रहनुमाई करेंगे। आदित्यनाथ का देवरिया से गहरा नाता है। अपने गैर राजनीतिक संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के जरिए उनकी गांव-गांव में पैठ है। जिले का कोई भी ऐसा गांव नहीं है, जिसमें वह किसी नामचीन आदमी को जानते न हो।
जब-जब हिन्दुओं पर जुल्म, ज्यादती ढाए गए, महंत दौड़े-दौड़े देवरिया चले आए। शारदीय नवरात्र में लार में मूर्ति विसर्जन के दौरान बलवा हुआ। उस समय महंत आदित्यनाथ नेपाल में हिन्दू सम्मेलन में भाग लेने गए थे। वहां से लौटते ही वह देवरिया आए। लार जाने वाले थे कि प्रशासन ने शांति व्यवस्था के मद्देनजर रोक दिया। हालांकि महंत ने देवरिया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि वह हिन्दू उत्पीड़न के विरोध में लार में हिन्दू महापंचायत करेंगे।
चूंकि चुनावी वर्ष था, लिहाजा वोट के खातिर उन्होंने कोई जोखिम मोल लेना मुनासिब नहीं समझा। यहीं से अंदाजा हो चला था कि आदित्यनाथ अब उग्र हिन्दू तेवर दिखाने से बच रहे हैं। जैसे अर्जुन का लक्ष्य मछली की आंख में तीर मारना था उसी प्रकार आदित्यनाथ का लक्ष्य का शायद सीएम की कुर्सी थी। विधानसभा चुनाव के दौरान महंत आदित्यनाथ का तेवर भी देवरिया में तल्ख नहीं दिखा। पहले उग्र हिन्दुत्व की बात करने वाले महंत ने पथरदेवा की चुनावी सभा में सभी धर्मों को साधने की कोशिश में लगे थे।
आदित्यनाथ भले ही रविवार को सीएम पद की शपथ लेंगे, लेकिन उनके लिए मर मिटने वाले हियुवा के कार्यकर्ताओं को मानो पूरा जहान ही मिल गया हो। विधानसभा चुनाव के दौरान हियुवा से जुड़े देवरिया के कई कार्यकर्ता टिकट की लाइन में खड़े थे। टिकट न मिलने से हियुवा कार्यकर्ताओं में नाराजगी जरूर हुई, लेकिन अपने अगुवा की डांट, डपट के आगे बुझे मन से भाजपा के लिए प्रचार-प्रसार करते रहे।
सिर्फ विधानसभा चुनाव में ही उन्होंने देवरिया जिले को नहीं मथा बल्कि लोकसभा चुनाव में कलराज मिश्रा के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया था। महंत के एक समर्थक ने कहा कि अब दिन हमारा है। बहुत जुल्म और ज्यादती सह चुके हैं।