देवरिया। गोरखपुर जिले का माफिया अजीत शाही मूल रूप से देवरिया का रहने वाला है। यहां वह अपनी सियासत चटकाने की फिराक में लगा था। एक बार ब्लाॅक प्रमुख बनने के बाद उसने विधान परिषद का चुनाव लड़ा, लेकिन सपा प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा था। धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बन गया और उसके गुर्गे जिले में बैंक बकायादारों पर उसके नाम का धौंस दिखाने लगे। पुलिस अब गोरखपुर में अदालत में आत्मसमर्पण कर सलाखों के पीछे पहुंच माफिया की देवरिया में भी तलाश रही है। उसके खिलाफ खामापार थाने में एक मुकदमा दर्ज है।
ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव में दबंगई दिखाते हुए माफिया ने एक पूर्व विधायक के आवास के पास जमकर गोलियां चलाई थीं। मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन जिले की पुलिस उसे गिरफ्तार करने से बचती रही। भाटपाररानी थाना क्षेत्र के पकड़ी बाबू का रहने वाला अजीत शाही का बचपन से लगायत पढ़ाई और अपराध की दुनिया का समय गोरखपुर में गुजरा है। अपराध की दुनिया में नाम कमाने और अकूत धन एकत्र करने के बाद राजनीति में पैर जमाने के लिए उसने गृह जिले की ओर कदम बढ़ाया था।
वर्ष 2010 के चुनाव में अजीत अपने गांव से निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुआ था। इसके बाद ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव मैदान में ताल ठोंक दिया। किसी की हिम्मत उसके खिलाफ उतरने की नहीं हुई। लगा कि निर्विरोध चुना जाएगा, लेकिन अंतिम क्षण में एक व्यक्ति ने पर्चा दाखिल कर दिया। वैसे परिणाम अजीत के पक्ष में रहा। इसके बाद 2016 में देवरिया-कुशीनगर के स्थानीय प्राधिकारी पद के लिए हुए चुनाव में भी अजीत ने किस्मत आजमाई, लेकिन समाजवादी पार्टी के रामअवध यादव ने उसे पराजित कर दिया। बसपा प्रत्याशी अजीत शाही को 1421 मतों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा। बसपा कमजोर हुई तो अजीत ने भी राजनीति से मुंह मोड़ लिया। अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद अजीत एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस उसके गुनाहों का लेखा-जोखा जुटाने में लग गई है। उसके खिलाफ खामपार थाने में एक मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव के दौरान उसने भिंगारी बाजार स्थित एक पूर्व विधायक के आवास पर गुर्गों के साथ फायरिंग की थी।
बैंकों की रकम वसूली का ले रखा है ठेका
माफिया अजीत शाही ने पूर्वांचल सहित कई अन्य प्रदेशों में बैंक रिकवरी का काम ले रखा है। जिसके जरिए इन जिलों में नेटवर्क मजबूत कर लिया। सवाल यह उठता है कि आखिर बैंक के इस महत्वपूर्ण कार्य में माफिया की इंट्री कैसे हो गई। उसके नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों की बातों पर गौर किया जाए तो दो फर्में हैं, जिसका मालिक अजीत विक्रम शाही है। इस नाम को लेकर असमंजस है। इसी कार्य की बदौलत अजीत ने कई जनपदों में अपना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
देवरिया जेल में भी रह चुका है माफिया
माफिया देवरिया जेल में भी करीब पंद्रह दिन बंद रह चुका है। गोरखपुर जेल से यहां ट्रांसफर होकर आया था। उस समय जेल में माफिया राज चलता था। मिलने वालों की संख्या भी काफी रहती थी। उसके लोग हर दिन जेल में मिलने आते थे, जिनके दम पर वह जेल से ही अपना काम संभालता था।
माफिया के बारे में जानकारी है कि वह जेल में बंद है। जिले की पुलिस की निगाह है। यहां पर उसके खिलाफ एक मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
-राजेश कुमार, एएसपी