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जिले में फर्जी तरीके से संचालित हो रहे 74 मदरसे

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बिना मान्यता के ही चल रहे 74 मदरसे
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विभागीय पोर्टल पर पंजीकृत न होने से खत्म हो चुकी है मान्यता, फिर भी संचालन
शासन का स्पष्ट निर्देश न होने का हवाला देकर कार्रवाई से हिचक रहे हैं अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जिले में 74 मदरसे दबंगई के बल पर चल रहे हैं। सरकार के निर्देशों पर संचालकों की मनमानी हावी है। विभागीय पोर्टल पर सूचनाएं अपलोड न करने से इन्हें सरकार से मिलने वाली सहायता बंद हो चुकी है। विभागीय रिकॉर्ड से भी यह गायब हो चुकी हैं, बावजूद उनका संचालन जारी है। शासन से कोई स्पष्ट दिशा निर्देश न होने से विभागीय अफसर भी कार्रवाई से हिचक रहे हैं। न तो इनकी कोई जांच कर रहा है और न ही कोई वहां पढ़ रहे बच्चों की सुध ले रहा। प्रबंधन की मनमानी का खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं।
वर्षों से अलग-थलग ढंग से चल रहे मदरसों को पटरी पर लाने के लिए वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार ने सभी मदरसों को विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण के निर्देश दिए थे। पंजीकरण के वक्त इन मदरसों को मान्यता, भवन, शिक्षक, बच्चों की संख्या, अनुदान की स्थिति सहित अन्य सुविधाओं का पूरा ब्योरा देना था। मंशा थी कि विभागीय पोर्टल पर मदरसे आ जाएंगे तो उनकी निगरानी आसानी होगी, साथ ही वहां सरकारी मदद देने में भी सहूलियत होगी। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2017 से पहले जिले में कुल 197 मदरसों का संचालन होता था। इन मदरसों में छात्रवृत्ति सहित सरकार की अन्य तरह की सुविधाओं का लाभ पहुंचता था। इनमें से 123 मदरसों ने ही मानक पूरा करते हुए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें 17 अनुदानित मदरसे शामिल हैं। शेष 74 मदरसों को मान्यताविहीन मानते हुए उन्हें सरकार से मिलने वाली छात्रवृत्ति सहित अन्य सुविधाओं के लिए अयोग्य मान लिया गया। हालांकि, विभागीय पोर्टल से अलग होने के बावजूद उनका संचालन नहीं बंद कराया जा सका है। पथरदेवा, देसही, रामपुर कारखाना, सलेमपुर और लार ब्लॉक में ऐसे मदरसों का अब भी संचालन हो रहा है। यहां सरकार का कोई शासनादेश प्रभावी नहीं है और न ही अन्य मदरसों की तरह एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जाती हैं। पूरी व्यवस्था प्रबंधन की मनमानी से चल रही है। न योग्य शिक्षक हैं और न ही मानक के अनुरूप भवन। शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। शौचालय का भी अभाव है। शिक्षकों का रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद नहीं होने से अभिभावकों में बच्चों को लेकर असुरक्षा का भाव रहता है।
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इनसेट
आधुनिकीकरण योजना से मिली सहूलियत
सरकार के आदेश के बाद आधुनिकीकरण योजना में शामिल हुए प्रत्येक मदरसों में तीन मौलवी-मौलानाओं को विभाग की ओर से मानदेय दिया जाता है। एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जाती हैं। यहां एनसीसी व एनएसएस भी लागू है। बच्चो को एनसीसी कोर्स की सुविधा मिलने से विभिन्न सरकारी नौकरियों में सहूलियत मिलेगी। मानक के अनुरूप भवन होने के साथ शौचालय, शुद्ध पेयजल आदि की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
इनसेट
ये हैं मदरसा चलाने के मानक
मदरसों के कमरे की लंबाई 20 फुट और चौड़ाई 15 फुट होना चाहिए, तहतानिया (कक्षा पांच) तक के मदरसों में तीन कमरा होना अनिवार्य है। फौकानिया (कक्षा आठ) तक मदरसा की मान्यता के लिए पांच कमरा होना जरूरी है। वर्ष 2016 के बाद मान्यता लेने वाले मदरसों के लिए नौ कमरा होना जरूरी है। इसके अलावा भवन की गुणवत्ता, अग्निशमन यंत्र, पेयजल, शौचालय आदि की शर्तों को पूरा करना होता है।
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कोट
वर्ष 2017 से पहले जिले में करीब 197 मदरसे थे। इनमें कई के पास भवन भी नहीं था। मानक पूरा करने वाले मदरसों को आधुनिकीकरण योजना में शामिल किया गया। बाकी मदरसों का रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं है। कुछ लोग बच्चों को मस्जिदों में धार्मिक शिक्षा दे रहे हैं।
-नीरज अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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