बघौचघाट। पिता साइकिल पर जूते-चप्पल बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। मां विद्यालय में रसोइया हैं। घर में आर्थिक तंगी है मगर बेटी अंकिता प्रजापति के सपने ऊंचे हैं। पथरदेवा विकास खंड के कौलाचक गांव की कक्षा 10 की छात्रा अंकिता ने अभावों के बीच मेहनत और लगन से ऊंची कूद में पांच बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है। वर्तमान में वह भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के बीएचयू, वाराणसी स्थित छात्रावास में प्रशिक्षण ले रही हैं।
अंकिता ने कक्षा सात में ऊंची कूद का अभ्यास शुरू किया था। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा।
उनकी मेहनत का नतीजा है कि आज उन्हें बेहतर प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। अंकिता ने साबित किया है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं।
अंकिता के पिता जितेंद्र प्रजापति अस्वस्थ रहने के बावजूद परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। बड़ी बेटी अंकिता ने भी उनके संघर्ष को अपनी ताकत बनाया और खेल के मैदान में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
पिता को उम्मीद है कि बेटी एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतेगी।