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Deoria News: होम्योपैथिक डॉक्टरों की कमी, सप्ताह में तीन दिन फार्मासिस्ट करते हैं इलाज

Sat, 10 Feb 2024 12:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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डे- प्लान की खबर
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फोटो
आठ राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल पर नहीं हैं डॉक्टर
फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे अस्पताल, मरीजों का नहीं हो पा रहा समुचित इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिला होम्योपैथिक विभाग में डॉक्टरों की कमी है। आठ अस्पतालों में पद रिक्त हैं। यहां पर दूसरे अस्पतालों से डॉक्टरों को संबद्ध कर काम चलाया जा रहा है। सप्ताह में तीन दिन फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल रहता है। एक अस्पताल पर फार्मासिस्ट ही इलाज करते हैं। ऐसे में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
जिले के शहर के से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए 27 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल हैं। इनमें डॉक्टर के 28 पद हैं। इसमें जिला अस्पताल में सौ से अधिक की ओपीडी है। मरीजों की भीड़ को देखते हुए यहां पर डॉक्टर के दो पद हैं।
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आठ अस्पताल डॉक्टरविहीन हैं। वहां प्रत्येक अस्पताल में हर रोज औसतन 45 से 50 मरीज आते हैं। इसमें शहर के आंबेडकर नगर अस्पताल पर डॉक्टर नहीं हैं। यहां रामपुर अवस्थी अस्पताल पर तैनात डॉ. अनघबेन सप्ताह में दो दिन मरीजों का इलाज करती हैं। सिरसिया स्वामीपट्टी में डॉ. योगेश्वर विश्वकर्मा, माथापार में गोड़वली के डॉ. अरुण कुमार, उसरा बाजार में डॉ. रविश कुमार राय सप्ताह में तीन दिन मरीजों का इलाज करते हैं।
बटुलही में रामलक्षन की डॉ. सृष्टि सिंह तथा अहिल्यापुर अस्पताल में हाटा अस्पताल के डॉ. शंभूजी सप्ताह में दो-दो दिन इलाज करते हैं। हौली बलिया में छपौली के डॉ. सुनित मसीही को दो दिन सेवा देते हैं। वहीं, सिसवा पांडेय अस्पताल में किसी डॉक्टर को संबद्ध नहीं किया गया है। यहां पूरे सप्ताह फार्मासिस्ट इलाज करते हैं। डॉक्टर के न होने से मरीजों को परेशानी होती है। गंभीर रोग के इलाज के लिए उन्हें दूसरे अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है। या फिर एलोपैथ का सहारा लेना पड़ता है।
इन अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर
देवरिया। राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल आंबेडकर नगर, अहिल्यापुर, सिरसिया, बटुलही, सिसवा पांडेय, माथापार, उसरा बाजार, हौली बलिया शामिल हैं।

अस्पताल का किराया सौ रुपये, किसी तरह मिलती है जगह
देवरिया। राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल के लिए मात्र सौ रुपये किराया सरकार की ओर से मिलता है। अस्पताल के लिए जगह तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। किसी एक कमरे व दुकान को किराए पर लेकर काम चलाया जा रहा है।
गांव में होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित है। लेकिन, यहां स्थायी डॉक्टर की तैनाती न होने से मजबूरी में फार्मासिस्ट से दवा लेनी पड़ती है।
-नितेश श्रीवास्तव सिरसिया नंबर एक

अंग्रेजी दवा के मुकाबले होम्योपैथिक दवा नुकसान नहीं करती है। यहां तीन दिन ही डॉक्टर आते हैं, अन्य दिन फार्मासिस्ट ही इलाज करते हैं। कभी-कभी दूसरी जगह जाना पड़ता है।
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-गोविंद मिश्रा रुस्तमपुर

जिले में चिकित्साधिकारियों की कमी है। इसकी सूचना निदेशालय को भेज दी गई है। आठ अस्पतालों में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के पद हैं। कुछ चिकित्सकों की प्रोन्नति हुई है। जल्द कमी दूर हो जाने की उम्मीद है। अस्पतालों में दवा की कमी नहीं है। -
डॉ. संजय कुमार सिंह, जिला होम्योपैथिक अधिकारी
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