देवरिया मेडिकल कॉलेज।संवाद
- फोटो : DEORIA
वार्ड में बरियारपुर क्षेत्र की किशोरी का इलाज चल रहा था। तीन दिन पहले छोटे गैस सिलिंडर पर खाना बनाते समय लगी आग से उसका चेहरा, हाथ झुलस गया है। वहीं, भाटपाररानी क्षेत्र की एक महिला गर्म तेल गिरने से जल गई।
दोनों काे भर्ती किया गया। न तो उन्हें मच्छरदानी में रखा गया है और न ही संक्रमण से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। किसी तरह उनका उपचार किया जा रहा है। जबकि इन मरीजों में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। परिजनों का कहना है कि बोतल, दवा, मरहम लगाया जा रहा है। गर्मी से परेशानी हो रही है।
बर्न वार्ड में यह रहती है व्यवस्था
झुलसे मरीजों के इलाज में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इन्हें संक्रमण फैलने की अधिक आशंका है। इस तरह के मरीजों के इलाज के लिए अलग से वार्ड बनाया जाता है। इसमें सेपरेट व अलग-अलग कमरे रहते हैं। जो एसीयुक्त व पंखा होना चाहिए।
हर मरीज को मच्छरदानी की व्यवस्था के अलावा प्लास्टिक सर्जरी के डॉक्टर, जनरल सर्जन, फिजीशियन, ट्रेंड स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय की तैनाती होनी चाहिए। ओटी भी होनी चाहिए। सेकेंड्री संक्रमण में बैक्टीरिया के फैलने की ज्यादा आशंका होती है। इससे बचाव की भी व्यवस्था रहती है।
सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में झुलसे मरीज कम आते हैं। मामूली रूप से झुलसे मरीजों का इलाज अस्पताल में किया जाता है। उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बर्न वार्ड न होने से गंभीर मरीजों के इलाज में दिक्कत आ रही है।
इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें बर्न वार्ड बनना है। इसके पूरा होने पर गंभीर मरीजों के इलाज में आसानी होगी। इसके बाद मरीजों व तीमारदारों को सहूलियत होगी।