बरहज। घाघरा के कहर से बर्बाद हो चुके कुरह परसिया गांव का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इस सप्ताह जिले का यह गांव इतिहास के पन्ने में दर्ज हो जाएगा।
सोमवार को कटान से प्रभावित गांव अपने अस्तित्व के अंतिम पड़ाव पर था। घाघरा की नजर गांव के अंतिम मकान पंचायत भवन पर थी। कटान के चलते नदी तो पहले ही गांव की करीब 200 से अधिक मकानों को निगल चुकी है।
बस बचा था गांव का पंचायत भवन। वह भी जद में आ गया। यहां के लोग बस अपने इस गांव को महज आंसुओं के साथ दिलों में ही कैद कर रख पाएंगे।
कुरह परसिया गांव को घाघरा ने वर्ष 2007 से ही मिटाना शुरू कर दिया था। सोमवार अंतिम दिन था। यहां नदी कटान करते गांव के बाहर बने पंचायत भवन पर पहुंच गई।
इस गांव में पहले ही अपनी गाढ़ी कमाई से बनी मकानों व माटी को जुदा होते देख श्याम नंदन सिंह, हरेकृष्ण, शिवमुनी, राजवंशी, रमेश, बीरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, सूर्यनारायण, सारनाथ, जुमाई, शंभू पांडेय, मोहम्मद्दीन, इसराइल, सलीम, वंशराज सिंह, रमायन तिवारी, साधू यादव आदि सैकड़ों लोग देख चुके हैं। दो सौ घरों के इस गांव में 1800 की आबादी रहती थी, इस गांव में अब महज पंचायत भवन बचा था।