देसही देवरिया। डुमरी एखलाश गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक श्रीप्रकाश मिश्र ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। कहा कि परमात्मा सबके अंदर हैं, पहचान करने की जरूरत है।
क्षेत्र के डुमरी एखलाश गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए कथावाचक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि मानव शरीर मंदिर की तरह है। इसे पवित्र रखना श्रेयस्कर है। पवित्र शरीर में ईश्वर का वास होता है। शुद्ध जीव का ब्रह्म के साथ मिलन और विलास ही रास है। जब इंद्र का अहंकार जगा तो उन्होंने ब्रजवासियों का अहित करने की ठान ली। श्रीकृष्ण ने उनका घमंड तोड़ने के लिए सात कोस के गोर्वधन पहाड़ को अपनी बाएं हाथ की सबसे छोटी उंगली पर उठाकर सारे ब्रजवासियों की रक्षा की। इससे इंद्र का अभिमान टूटा। इसी तरह कामदेव का भी अभिमान जाग उठा। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण के पास आकर कामदेव ने कहा कि आप हमसे युद्ध कर लीजिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा एक बार तो शिव से लड़ते-लड़ते बिना शरीर के हो गए। अब हमसे क्या लड़ोगे। इस पर कामदेव ने कहा कि उस समय शिव समाधि अवस्था में थे, तब मुझे जला दिए। आप तो नियमों का पालन करते नहीं। गोपियों के साथ रास रचाते हैं। जब आप गोपियों के साथ रास करेंगे तब मैं काम बाण चलाऊंगा। इसमें आप जीते तो जगत के ईश्वर, हारे तो मैं। श्रीकृष्ण ने कामदेव की चुनौती स्वीकार कर ली। शरद पूर्णिमा की रात्रि में गोपियों के साथ रास नृत्य प्रारंभ कर दिया। उधर, कामदेव ने उन पर अपना बाण चलाना प्रारंभ कर दिया। अंत में कामदेव पराजित हो गए।