कोटेदार और प्रधान समर्थक महिलाओं के बीच होता झड़प
एसडीएम कार्यालय के बाहर प्रधान और कोटेदार के समर्थक आपस में भिड़ गए। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। महिलाओं ने चप्पल से कोटेदार पक्ष के लोगों की पिटाई कर दी। वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह मामले को शांत कराया। एसडीएम ने कोटेदार के खिलाफ पूर्व में की गई जांच की फाइल तलब की है।
लार ब्लॉक के जमसड़ा गांव के कोटेदार जवाहर प्रसाद गुप्त पर आरोप है कि उसने मार्च का राशन बाहर बेच दिया था। इसकी शिकायत गांव वालों ने डीएम और एसडीएम से की। जांच शुरू हुआ तो अपने को फंसता देख कोटेदार मेडिकल पर चला गया। इसके बाद जमसड़ा की दुकान चौमुखा गांव के कोटेदार राजेश की दुकान में संबद्घ हो गई। फिटनेस रिपोर्ट देने पर 24 जून को एसडीएम ने जमसड़ा की कोटे की दुकान को बहाल कर दिया। इसकी जानकारी सोमवार को गांव वालों को हुई।
गांव की प्रधान सुशीला देवी के नेतृत्व में गांव की महिलाएं मंगलवार को एसडीएम कार्यालय पर पहुंची और पूर्ति विभाग के अफसरों पर जांच में लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगी। इसी बीच कोटेदार जवाहर प्रसाद गुप्त के समर्थक तारकेश्वर कुशवाहा, शंभू प्रसाद, शिवशंकर प्रसाद, मुसाफीर, अमरनाथ, अजीत कुमार भी एसडीएम कार्यालय में पहुंच गए। एसडीएम के सामने दोनों पक्ष के बीच कहासुनी होने लगी। कार्यालय से बाहर निकलते ही प्रधान और कोटेदार के समर्थकों ने आपस में मारपीट कर ली। महिलाएं प्रधान के समर्थकों की पिटाई कर दी। इससे तहसील कैंपस में भगदड़ मच गई। लोगों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। कोटेदार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों में मीना देवी, प्रमोद भारती, अनीता देवी, विद्यावती, लीलावती, प्रभावती, फुलेसरी शामिल रही।