बसपा सरकार में बने कांशीराम शहरी आवास सात साल में ही जर्जर हो गए। प्लास्टर टूट रहे हैं। नालियों का गंदा पानी नीचे के तल में बहने से लोगों को परेशानी हो रही है। मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। परिसर में फैली गंदगी स्वच्छता अभियान की पोल खोल रही है।
मेहड़ापुरवा स्थित आवास में हर तरफ दुश्वारियां साफ दिखाई पड़ रही हैं। छतों के प्लास्टर टूटकर गिर रहे हैं। मरम्मत तो दूर दोबारा भवन की रंगाई-पुताई भी नहीं हुई। स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए बनाई गई टंकी का आज तक इस्तेमाल नहीं हो सका है। शहर में रहकर भी आवासधारक आदिवासियों की जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। 80 फीसदी बच्चे शिक्षा से वंचित हैं।
इस संबंध में सीडीओ राजेश त्यागी ने कहा कि कांशीराम शहरी आवास के रख-रखाव की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। इसकी मरम्मत की देखरेख का जिम्मा उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता। उधर, नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि नगरपालिका अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए कांशीराम शहरी आवास धारकों को सफाई और पेयजल सुविधा मुहैया करा रही है। भवन के रख-रखाव का जिम्मा उनके विभाग का नहीं है।
इनसेट
ऐसी थी व्यवस्था
खुले आसमान तले गुजर-बसर कर रहे गरीबों को बसपा सरकार ने वर्ष 2011 में कांशीराम शहरी आवास योजना के माध्यम से पक्का घर आवंटित किया। इस कॉलोनी में 168 लोगों को आवास दिए गए। बिजली, पानी, स्कूल, बच्चों के खेलने आदि सभी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा गया। चंद दिनों बाद सभी सुविधाएं धूल फांकने लगीं। कुछ ही दिनों में वायरिंग में फाल्ट की समस्या आने लगी। पानी की टंकी शोपीस बनकर रह गई। टंकी पर जाने वाली सीढ़ियाें से कूदकर कुछ माह पूर्व रामगुुलाम टोला की एक लड़की ने जान दे दी थी। कॉलोनी के बच्चों को खेलने के लिए बनाए गए झूले, खिलौने टूट चुके हैं।
दिन भर होता है जुआ
कांशीराम शहरी आवास में सुबह शुरू हुआ जुआ देर शाम तक चलता है। जीतने वाला गिरोह रात में दारू पीकर जश्न मनाता है। पानी की टंकी पर जश्न की नुमाइश होती है। इसके चलते बाकी लोगों को रात में सोने में दिक्कत होती है।
आवास धारकों का है अपना दर्द
स्वामीनाथ का कहना है कि बसपा सरकार ने गरीबों को आवास नहीं झुनझुना थमाया था। आवास निर्माण की गुणवत्ता का हाल दो साल में ही सामने आने लगा। नजदीक से ट्रेन गुजरने से उसके कंपन के चलते छतों के टुकड़े गिरते हैं। शौकत अली का कहना है कि आवास निर्माण के बाद किसी सरकार ने कॉलोनी की समस्या पर ध्यान नहीं दिया। काशी का कहना है कि कॉलोनी का माहौल खराब हो गया है। शहर में रहकर भी यहां के लोग शहर के रहन-सहन से वाकिफ नहीं हो पा रहे हैं। मोहित का कहना है कि यहां रह रहे परिवारों में शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी है। प्रशासन को चाहिए कि यहां अधिकारियों को भेजकर लोगों को जागरूक करें।