देवरिया। जिले को मऊ और वाराणसी से जोड़ने वाली मुख्य सड़क सोनूघाट-बरहज मार्ग को 10 मीटर चौड़ा करने की स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे फोरलेन बनाने पर भी चर्चा चल रही है। वजह यह कि इस सड़क पर वाहनों का दबाव अधिक है।
यह सड़क रामजानकी मार्ग को भी जोड़ती है। इसीलिए इसे फोरलेन बनाने की जरूरत आने वाले समय में पड़ेगी। जन प्रतिनिधियों के सुझाव पर लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए आकलन शुरू कर दिया है।
सोनूघाट-बरहज मार्ग को चौड़ा और सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अन्य प्रमुख जिला सड़कों के विकास के तहत इस मार्ग को पहले 10 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन बढ़ते यातायात और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की जरूरतों को देखते हुए अब इसे फोरलेन बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
वर्तमान में इस सड़क पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों, व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वालों का कहना है कि सड़क संकरी होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।
भारी वाहनों और ग्रामीण इलाकों से आने-जाने वाली छोटी गाड़ियों की भीड़ इस मार्ग को बेहद व्यस्त बना देती है।
यही कारण है कि इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फोरलेन बनाने की बात तेजी से आगे बढ़ रही है।
लोगों का बचेगा समय : इस मार्ग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह रामजानकी मार्ग से भी जुड़ता है, जो धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस सड़क के विस्तार से न केवल देवरिया और कुशीनगर के लोगों को फायदा होगा, बल्कि गोरखपुर, आजमगढ़ और मऊ की ओर जाने वाली यातायात व्यवस्था भी मजबूत होगी।
साथ ही बरहज और सोनूघाट के आसपास के कस्बों के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। चौड़ी सड़क से यात्रा समय कम होगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित फोरलेन योजना को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा शुरू हो चुकी है। तकनीकी सर्वे, यातायात घनत्व का अध्ययन और संभावित भूमि अधिग्रहण की जरूरतों पर भी विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि यह परियोजना स्वीकृत हो जाती है तो आने वाले सालों में यह सड़क पूर्वांचल की प्रमुख लाइफलाइन बन सकती है। वहीं स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर उत्साह है कि फोरलेन सड़क बनने से क्षेत्र का विकास कई गुना बढ़ जाएगा।
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