-ससुर की संपत्ति हड़पने के लिए हत्या कर चचेरे साले को फंसाने की रची थी साजिश
देवरिया। ससुराल में ससुर की संपत्ति हड़पने के लिए बालक की हत्या कर चचेरे साले को फंसाने के मामले में शुक्रवार को अदालत ने फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने आरोपी के दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तथा 17 हजार रुपये जुर्माना से दंडित करने की सजा सुनाई।
सहायक शासकीय अधिवक्ता हरेंद्र निषाद ने बताया कि कोतवाली थाना क्षेत्र के मुंडेरा निवासी मुन्नीलाल का नाती सिंटू (6 वर्ष) 10 जून 1915 को गांव में आई बरात में नाच देखने गया था। देर रात तक जब सिंटू घर नहीं लौटा तो घरवाले ढूंढने लगे। सुबह सिंटू की गर्दन कटी लाश गांव के पोखरे में मिली। मुन्नीलाल की सूचना पर सदर कोतवाली में अज्ञात पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। सिंटू के शव के पास दो लोगों के मिले आधार कार्ड के जरिए पुलिस दोनों व्यक्तियों तक पहुंची।
विवेचना में पाया गया कि कुशीनगर जिले के पडरौना कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चौरिया निवासी सच्चिदानंद पुत्र गोमती के आपराधिक मामलों में लिप्त होने के कारण उसकी पत्नी ने उसे छोड़ दिया था। ससुराल में नेवासा होने के कारण सच्चिदानंद पत्नी को छोड़ना नहीं चाहता था, ऐसी स्थिति में उसने निर्दोष मासूम की हत्या कर अपने चचेरे साले को फंसाने के लिए उनके फर्जी आधार कार्ड बनवाकर शव के पास फेंक दिया था। उभय पक्ष के तर्कों व साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अदालत ने पाया कि आरोपी ने मासूम की हत्या कर जघन्य अपराध किया है। ऐसे में आरोपी को कठोर दंड से दंडित करते हुए जेल भेज दिया।