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जुलूस निकाल आधी आबादी ने कराया ताकत का एहसास

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भाजपा महिला मोर्चा ने सम्मान समारोह आयोजित किया। - फोटो : amar ujala
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देवरिया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विभिन्न संगठनों से जुड़ीं महिलाओं ने सड़कों पर बैंड-बाजे एवं अपने नारी होने के स्वाभिमान के साथ जुलूस निकाला। उन्होंने महिला हितों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और लोगों को महिलाओं का सम्मान करने का संदेश दिया। कई स्कूल-कॉलेजों में भी गोष्ठी का आयोजन कर आधी आबादी को सशक्त बनाने का संकल्प लिया गया।  
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अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन से जुड़ी महिलाओं ने शुक्रवार को सुभाष चौक पर हाथों में झंडा, बैनर के साथ जुलूस निकाला, जो पूरे शहर में होकर गुजरा। जुलूस में महिलाओं पर अत्याचार बंद करो, महिला मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करो, महिलाओं को सम्मान एवं सुरक्षा की गारंटी दो जैसे नारे गूंजते रहे। जिलाध्यक्ष गीता पांडेय ने कहा कि महिलाओं के हर अधिकार के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा। जुलूस में सुमन, संगीता वर्मा, प्रियंका, शीला पांडेय, नीलम सिंह, सविता सिंह, चंदा, आशा, राबड़ी देवी, रेखा वर्मा, शोभा, लक्ष्मीना, पूनम गुप्ता, सुशीला, बसंती, लीलावती आदि शामिल रहीं। महिला एकता शक्ति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने रंग-गुलाल उड़ाते हुए टाउनहाल से जुलूस निकाला। सिविल लाइंस होते हुए वे कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित 10 सूत्री ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा। संगठन की अध्यक्ष मन्नू तिवारी ने कहा कि प्रदेश में नशाखोरी, दहेज प्रथा बंद करने, महिलाओं को प्रति माह 10 हजार रुपये पेंशन, 50 प्रतिशत आरक्षण, छेड़खानी, हत्या व महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर जब तक रोक नहीं लगाई जाती, संघर्ष जारी रहेगा। इसमें सीमा, कांति, प्रेमशीला, किसनावती, दुर्गा, मुस्कान, प्रभावती, प्रीति, सीता, आकांक्षा, सोनी आदि शामिल रहीं। 

महिलाओं को मिले पूर्ण आजादी
संत विनोबा पीजी कॉलेज में आयोजित गोष्ठी विधि विभाग के अध्यक्ष डॉ. केके शाही ने कहा कि संविधान में दिए गए अधिकार महिला सशक्तिकरण की नींव को मजबूत करते हैं। वर्तमान परिदृश्य में महिलाओं को और अधिकार दिए जा रहे हैं। प्राचार्य डॉ. असीम सत्यदेव ने कहा कि आधी आबादी की बात तब तक आधी रहेगी जब तक महिलाओं को पूर्ण आजादी न प्राप्त हो। हालांकि, महिलाओं ने अपने कार्यों से देश का नाम रोशन किया है। मौके पर चंद्रभूषण तिवारी, मृत्युंजय शुक्ल, डॉ. धनंजय मद्धेशिया ने भी संबोधित किया। संचालन विधि क्लब के सचिव शुभम त्रिपाठी ने किया। उधर, सपा महिला सभा की जिलाध्यक्ष शोभा यादव के नेतृत्व में कार्यालय पर महिला दिवस मनाया गया। मौके पर कार्यकर्ताओं ने आर्थिक व शैक्षिक रूप से महिलाओं को सशक्त करने का संकल्प लिया। इस दौरान लालमती निषाद, मुन्नी देवी, संतोषी, मीना, कैलाशी आदि मौजूद रहीं। महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज व एसएसबीएल के एनसीसी की 49वीं बटालियन के कैडेटों ने डॉ. राजेश मिश्र के नेतृत्व में जागरूकता रैली निकाली। एनसीसी ऑफिसर एसके मौर्य ने महिलाओं के बढ़ते प्रभाव के बारे में जानकारी दी और उनके मान-सम्मान की रक्षा का आह्वान किया। रैली में अखिलेश कुमार पांडेय, राजेंद्र जायसवाल आदि शामिल रहे।
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अपने संघर्षों के बदौलत डंका बजा रहीं महिलाएं

देवरिया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने समाज की शोषित और कमजोर महिलाओं को माला पहनाकर सम्मानित किया। संघर्षों की बदौलत यह महिलाएं परिवार को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। 
महिला मोर्चा की जिला प्रभारी रंजना राय ने कहा कि  समाज के सभी क्षेत्र में महिलाएं डंका बजा रही हैं। गणतंत्र दिवस के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब महिला सैनिकों ने परेड में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं को मजबूत किया गया। 181 महिला हेल्पलाइन व रेस्क्यू वैन सेवा शुरू किया गया। प्रदेश के 40 जिलों में शबरी योजना लागू कर महिलाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।  भारती शर्मा ने कहा कि महिलाओं के सम्मान को बढ़ाने तथा समाज में आगे लाने के लिए प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। महिला सशक्तिकरण के लिए प्रदेश के 75 जिलों में वन स्टाप सेंटर खोलने की स्वीकृति दी गई है। इस दौरान भाजपा महामंत्री कृष्णानाथ राय, मिनती सिंह, मंजू मिश्रा, अंबिकेश पांडेय, मुन्नी शर्मा, निर्मला गौतम, रेनू देवी, सुवर्णा, सुमन पांडेय, उषा यादव, यशोदा देवी, मधु गौतम, सरोज देवी, शीला देवी, सोनिया देवी, उमा भारती, सविता जायसवाल, गंधारी देवी, गीता राव, माया जायसवाल, बिंजुला देवी आदि रहे।

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आत्मनिर्भर बन महिलाएं बिखेर रहीं हुनर की खुशबू

रुद्रपुर। कौन कहता है कि गांव की महिलाएं पीछे हैं। यकीं नहीं होता तो बैदा गांव आइए। गांव की कई महिलाएं नारी को अबला कहने वालों को आईना दिखा रही हैं। अगरबत्ती बनाने के हुनर के जरिए वह न सिर्फ परिवार चलाने में योगदान दे रही हैं, बल्कि उनके परिश्रम की खुशबू से गोरखपुर-देवरिया की सीमा सुगंधित हो रही है। बाढ़ प्रभावित इलाके में प्रकृति की मार से हर साल जूझने का जज्बा ही तो इन्हें अपराजिता बना रहा।
गांव में करीब एक साल से महिलाएं अपने खाली समय का उपयोग अगरबत्ती बनाने में कर रहीं। देवरिया और गोरखपुर जनपद के सरहद पर बसे इस गांव की अगरबत्ती सीमावर्ती गांवों के पूजा घरों की शान बन गई है। अगरबत्ती की खुशबु से जहां लोगों का पूजा घर पवित्र हो रहा वहीं अगरबत्ती बनाने वाले हाथों का घर आंगन भी महक रहा है। गरिमा अगरबत्ती की पूछ गोरखपुर जिले और रुद्रपुर क्षेत्र की हर छोटी बड़ी बाजार में बढ़ रही है। महिलाओं में चूल्हा चौका के बाद बचे समय में कमाने का जज्बा गांव की एक महिला पार्वती देवी ने पैदा किया। वह पहले मुंबई में रहती थीं। बड़े शहरों में रहने वाली घरेलू महिलाओं के कामकाज की नजीर पेशकर उन्होंने घूंघट में रहने वाली गांव की महिलाओं को काम से जोड़ा। बिना किसी सरकारी सहायता के अगरबत्ती बनाना शुरू किया। अगरबत्ती बेचने के लिए गांव के कुछ लड़कों को सेल्समैन बना दिया। गांव की सोमारी देवी, बिंदु, सरिता, सुहानी सहित तमाम महिलाएं अगरबत्ती बनाने और भरने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगरबत्ती बनाने से वह हर माह करीब तीन से पांच हजार रुपये कमा लेती हैं। इससे वह अपना घर खर्च चला लेती हैं। पहले सिर्फ पति के कमाने से बच्चों की पढ़ाई आदि का बोझ उठाना कठिन हो गया था। जब से अगरबत्ती का काम मिला है घर परिवार और पढ़ाई का खर्च आसानी से पूरा हो रहा है।
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