रामजी सहाय पीजी कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजन
रुद्रपुर। रामजी सहाय पीजी कॉलेज में सोमवार को भारतीय इतिहास एवं अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहयोग से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सेमिनार में ऐतिहासिक स्थलों का अन्वेषण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्वानों ने अपना विचार व्यक्त किया। संगोष्ठी का शुभारंभ दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने किया।
मुख्यातिथि और राष्ट्रीय इतिहास संकलन विभाग के संगठन सचिव डॉ बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को विदेशी इतिहासकारों ने साजिश के तहत कमतर कर पेश किया। अब भारतीय इतिहास अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुन: प्राप्त कर रहा है। नई शिक्षा नीति आने के बाद अब भारत का इतिहास भारतीयों का होगा। पूर्वाचल का इतिहास पुराणों में है। यह क्षेत्र छीर सागर है। इस क्षेत्र में नारायण निवास करते है।
उन्होंने कहा कि देवरिया ज्ञान परंपरा का उद्गम स्थल रहा है। यहां नारायणी नदी है। दुनिया में नारायणी नदी के अलावा कही भी भगवान शालीग्राम का पत्थर नहीं मिलेगा। इसीलिए इस क्षेत्र को देवारण्य कहा जाता है। कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि नई शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा में नवाचार बढ़ रहा है। सेमिनार जैसे आयोजनों से विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ता है। उन्होंने सेमिनार में प्राध्यापकों के अलावा छात्रों को भी अपने विचार रखने पर जोर दिया।
एक शैक्षणिक सत्र में चार राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करने के लिए प्राचार्य प्रो बृजेश कुमार पांडेय की सराहना की। इस अवसर पर कुलपति ने सेमिनार की पुस्तक का विमोचन किया। संगोष्ठी को डॉ. ओम जी उपाध्याय, प्रो ओपी श्रीवास्तव, प्रो रजवंत राव, प्राचार्य बृजेश कुमार पांडेय ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी का संचालन प्राचीन इतिहास विभाग के आशुतोष कुमार सिंह ने किया।