अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बैतालपुर गन्ना समिति के अध्यक्ष गदाधर मणि त्रिपाठी के निधन के बाद अब समिति में कुर्सी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मंगलवार को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनके निधन के बाद जहां क्षेत्र में शोक की लहर थी, वहीं शुक्रवार को गन्ना समिति कार्यालय में हुए घटनाक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
आरोप है कि गन्ना समिति की उपाध्यक्ष राधिका देवी अपने पुत्र एवं पूर्व अध्यक्ष जयराम मणि उर्फ अनिल मणि के साथ गन्ना समिति कार्यालय पहुंचीं और सचिव की मौजूदगी में अध्यक्ष कक्ष का ताला खुलवाकर अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया।
इस पूरे घटनाक्रम में सचिव की भूमिका भी अब चर्चा का विषय बन गई है। दिवंगत अध्यक्ष गदाधर मणि त्रिपाठी के समर्थकों ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है।
समर्थकों का कहना है कि शोक की घड़ी में इतनी जल्दबाजी करना नैतिक रूप से गलत है। साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि सचिव की मौजूदगी में यह कार्रवाई किस आधार पर कराई गई। समर्थकों का आरोप है कि बिना व्यापक सहमति के यह कदम उठाया गया।
दूसरी ओर गन्ना समिति के पूर्व अध्यक्ष अनिल मणि त्रिपाठी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव उत्तर प्रदेश सहकारी निर्वाचन आयोग द्वारा कराया गया था, जिसमें गदाधर मणि त्रिपाठी अध्यक्ष और राधिका देवी उपाध्यक्ष चुनी गई थीं। अनिल मणि ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 30(4) का हवाला देते हुए कहा कि अध्यक्ष पद किसी भी कारण से रिक्त होने की स्थिति में उपाध्यक्ष अगले चुनाव तक अध्यक्ष पद का दायित्व संभाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि सचिव द्वारा बुलाए जाने पर ही उनकी माता राधिका देवी ने नियमानुसार अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया है।
फिलहाल गन्ना समिति का यह मामला अब खुलकर राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।