संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। चार यार मिल जाएं तो चाय की चार घूंट चल ही जाती है, मगर सावधान रहिए। कहीं आप केमिकल वाली चाय न पी रहे हों। सस्ती, ज्यादा कड़क और गहरे रंग की चाय में बड़ा खेल है। इसमें निकोटिन के साथ केमिकल भी मिला है। यह सेहत के लिए खतरनाम है।
शहर से लेकर गांव तक बेधड़क मिलावटी खुली चायपत्ती बेची जा है। चायपत्ती देखने में असली दिखती है, मगर रंग गाढ़ा आए इसके लिए केमिकल मिला होता है।
सस्ते के चक्कर में लोग खुली चायपत्ती खरीद रहे हैं। दुकानदार इसे 180 से लेकर 200 रुपये किलो तक बेच रहे हैं, जिसे फुटकर चाय की दुकानों पर डिब्बे में रख दिया जाता है।
खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने काफी पहले गौरी बाजार में छापा मारकर चायपत्ती के नमूने लिए थे। इस दौरान 120 क्विंटल चायपत्ती को नष्ट भी कराया गया था। इस मामले में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की टीमसंबंधित दुकानदार पर अग्रिम कार्यवाही कर रही है। सूत्र बताते हैं कि धंधेबाज मिलावटी चायपत्ती ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में खपा रहे हैं। शहर में स्टेशन और बस स्टैंड के आसपास की दुकानों पर यह ज्यादा बिकती है।
पिछले माह भेजा गया एक नमूना पाया गया फेल: खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग जिले में समय-समय पर चायपत्ती के नमूने लेता रहता है। एक चायपत्ती का नमूना जांच में फेल पाया गया था। जांच रिपोर्ट में अधोमाननक मिलावटी पाया गया।