फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार कस्तूरबा विद्यालयों में छह माह में भी नहीं हो पाई कंप्यूटर की सप्लाई

विज्ञापन
विज्ञापन
चार कस्तूरबा विद्यालयों में छह माह में भी नहीं हो पाई कंप्यूटर की सप्लाई
विज्ञापन

नवंबर में हुआ था टेंडर, दिसंबर माह में देना था सामान
कम्प्यूटर के अलावा किचन के कई सामान, बेड, आलमारी खरीदे जाने थे
पिछले वित्तीय वर्ष में 16 लाख रुपये का अधिकारियों ने दिखा दिया व्यय
संवाद न्यूूज एजेंसी
देवरिया। अनामिका शुक्ला प्रकरण को लेकर प्रदेश के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय अभी चर्चा के विषय बने हुए हैं। अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से किए गए गड़बड़झाला का यह ही एकमात्र उदाहरण नहीं है। जिले के चार कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में पिछले साल ही कम्प्यूटर, किचेन सेट के सामान, आलमारी, बेड आदि खरीदने को 16 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। टेंडर निकले छह माह बीत गए, आज भी यहां पर इन सामानों का इंतजार हो रहा है।
जिले में वर्तमान में 13 कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों का संचालन हो रहा है। पिछले साल बनकटा, रामपुर कारखाना, गौरीबाजार, पथरदेवा में संचालित कस्तूरबा विद्यालयों में कम्प्यूटर एवं इसकी एसेसरीज के लिए एक लाख व तीन लाख रुपये डायनिंग टेबल, आलमारी, बेड, किचेन के बर्तन सहित अन्य सामान के लिए प्रत्येक को 4-4 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। नवंबर माह में इन दोनों कार्यों के लिए टेंडर भी हो गया था। चयनित फर्म को दिसंबर माह में इन सामान की आपूर्ति कर देनी थी। जबकि हकीकत यह है कि छह माह बीत जाने के बाद भी इन सामान की आपूर्ति इन विद्यालयों को अब तक नहीं हुई है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में 16 लाख रुपये का व्यय भी बेसिक कार्यालय के अधिकारियों ने दिखा दिया है। दबे जुबान तो चर्चा यहां तक है कि अधिकारियों व संबंधित अन्य लोगों ने इस रकम का गबन कर लिया है।
विज्ञापन

कुछ सामानों की आपूर्ति चारों जगहों पर हो गई है। कम्प्यूटर व इससे एसेसरीज सहित अन्य सामानों का अभी सत्यापन बाकी है। जल्द ही इसे भी चारों कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में पहुंचा दिया जाएगा।
विज्ञापन

-त्रिभुवन नाथ पांडेय, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा
टीचर लर्निंग मैटेरियल व किचन इक्यूमेंट के लिए चार कस्तूरबा के लिए धन आवंटित किया गया था। सामान पहुंचा कि नहीं, इस बारे में वह कुछ नहीं बता सकते। गबन किए जाने का आरोप निराधार है।
-डॉ.उपेंद्र मणि त्रिपाठी,
सहायक वित्त व लेखाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें