- दूध में हो रहा डिटरजेंट, पानी, सिंथेटिक, स्टार्च आदि केमिकल का मिलावट
- खाद्य सुरक्षा एवं औषधि निरीक्षण विभाग की जांच में मिल्क प्रोडक्ट के 123 में से 103 नमूने हुए फेल
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। जिले में रोजाना हजारों लीटर दूध का कारोबार हो रहा है। जब जितना पनीर, मिठाई, दही कुछ भी मिल्क प्रोडक्ट खोजिए तुरंत मिल जाता है। ऐसे में कभी आपने सोचा है कि इतने दूध और खोवा आ कहां से रहा है। जिले में 98 प्रतिशत दूध से बने उत्पाद मिलावटी हैं। इनके सेवन से आपकी किडनी, लिवर समेत अन्य अंग खराब हो सकते हैं। दूध में मिलावट की यह रिपोर्ट खाद्य एवं औषधि निरीक्षण विभाग की ओर से लिए गए नमूनों की जांच में सामने आई है।
दूषित खानपान से लोगों की सेहत खराब न हो इसके लिए खाद्य एवं सुरक्षा औषधि निरीक्षण विभाग विभिन्न त्योहारों के मौके पर छापा मारकर अभियान चलाता है। बीते सत्र 2022-23 में खाद्य एवं औषधि निरीक्षण विभाग ने दूध से बने 123 प्रोडक्ट का नमूना लिया था। इसमें खोवा के 50, पनीर के 12, घी के 13, छेना के 21 अन्य सात मिल्क पदार्थ समेत 103 के नमूने में गड़बड़ी मिली है।
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सूत्रों की मानें तो यूरिया, अमोनिया, नाइट्रेट फर्टिलाइजर और स्टार्च जैसे कई हानिकारक तत्व मिलाकर दूध तैयार किया जा रहा है। ज्यादातर दूधिया दूध में मिले पानी को गाढ़ा बनाने के लिए इन सब चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बच्चों व वृद्ध की सेहत पर पड़ता है गहरा प्रभाव
सीएमएस डॉ एचके मिश्रा ने बताया कि बच्चों का लिवर बड़ों की तुलना में ज्यादा सेंसेंटिव और कमजोर होता है। ऐसे में मिलावटी दूध इन्हें जल्दी और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। वृद्ध लोगों का लिवर भी एक समय के बाद कमजोर होने लगता है। ऐसे में मिलावटी होने के कारण इसे पचाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसमें मिले केमिकल शरीर से लड़ने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर डालते हैं।
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ऐसे करें जांच
दूध में पानी मिलाएं, यदि झाग आए तो दूध में डिटर्जेंट मिला हुआ है। दूध को हथेलियों के बीच रगड़ें यदि यह साबुन जैसा चिकना लगे तो यह सिंथेटिक दूध हो सकता है। इसके अलावा इसे गर्म करने पर यह हल्का पीला हो जाता है। स्टार्च के मिलावट की जांच करने के लिए दूध में कुछ बूंदे आयोडीन टिंचर या आयोडीन सॉल्यूशन की डालें, यदि दूध का रंग नीला हो जाए तो इसका मतलब दूध मिलावटी है।
इसलिए धंधेबाज करते हैं मिलावट
दूध में डिटर्जेट, यूरिया, अमोनिया, नाइट्रेट फर्टिलाइजर, स्टार्च, शुगर, ग्लूकोज और नमक मिलाकर इसकी मात्रा बढ़ाई जाती है। इससे दूध में गाढ़ापन आता है और फैट भी बढ़ता है। इन सब को मिलाने से दूध में खटास पैदा होता है। जिसे रोकने के लिए इसमें न्यूट्रलाइजर भी मिलाया जाता है। वहीं हाइड्रोजन परॉक्साइड और फॉर्मेलिन मिलाने से दूध को कई दिनों तक स्टाकर किया जा सकता है। यूरिया और अमोनिया मिलाने से इसका टेस्ट खराब हो जाता है। जिसे ठीक करने के लिए ही स्टार्च को मिलाते हैं।
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मिलावटी होने के चलते बच्चे दूध पीने में आनाकानी करते हैं। दूधिया बदलने पर कुछ दिनों तक तो ठीक दूध मिलता है, बाद में वह भी उसी तरह का दूध देने लगता है। असली और मिलावटी दूध की पहचान करना बड़ा मुश्किल हो गया है। - लवली सिंह, ग्राहक
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दूध के कारोबार पर खाद्य सुरक्षा विभाग को हमेशा पैनी नजर रखनी चाहिए। मिलावटी दूध पीने से बच्चों व वृद्धजनों की सेहत खराब होती है। - सचिंद्र नाथ, ग्राहक
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वर्जन
बीते सत्र में मिल्क प्रोडक्ट के 123 नमूने लिए गए थे, जांच में 103 की रिपोर्ट गड़बड़ आई है। किसी में पानी की मिलावट तो किसी में फैट कम या अधिक मिला है। कैमिकल मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - रमेश चंद्र पांडेय, सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय