संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। औद्योगिक क्षेत्रों में जगह की किल्लत नए उद्योगों की स्थापना मेंं अड़चन आड़े रही हैं। उद्यमियों की पहल पर लैंड बैंक बनाने की जिला प्रशासन की कोशिशें भी परवान नहीं चढ़ पा रही हैं।
इसके चलते नए उद्योग स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। अब इसका निदान प्लेज (प्रमोटिंग लीडरशिप एंडएंटरप्राइज फाॅर डेवलपमेंट ऑफ ग्रोथ इंजन) करेगा। प्रदेश सरकार के नए नियम से औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की राह खुल गई है। कुछ लोगों ने इस संबंध में उद्योग कार्यालय में संपर्क कर जानकारी भी ले रहे है।
जिले मेंं उद्योगों की स्थापना के लिए सन 1963 में इंडस्टि्रयल एरिया पुरवां की स्थापना हुुई।
इसे करीब 27 एकड़ भूमि पर विकसित किया गया। इसमें सर्विस सेंटर से लेकर कई उद्योग पनप चुके हैं। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
इसके अलावा सलेमपुर, पथरदेवा, भाटपाररानी, गौरी बाजार में मिनी इंडस्टि्रयल एरिया में भी अनेक उद्योग लगे हैं। अब बदले परिवेश मेंं उद्यम को सरकार और बढ़़ावा दे रही है। इसके चलते युवा उद्यमी सरकार की योजनाओं से ऋण लेकर अपना उद्योग शुरू करने का सपना देखने लगे हैं, मगर जमीन की किल्लत आड़े आ रही है।
करीब एक साल पहले उद्योग बंधु की बैठक में यह मुद्दा उद्यमियों ने डीएम के समक्ष उठाया था। डीएम ने तहसीलों से पांच एकड़ के लैंड की डिटेल मांगी। जवाब में कोई लैंड नहीं मिल सका। इससे उद्यमियों में निराशा छा गई।
जिले की दो मिनी इंडस्टि्रयल एरिया में उद्योग की जगह कांशीराम आवास योजना को अमली जामा दे दिया गया। इसमें से रुद्रपुर में आवास बन भी गए और आवंटित भी।
उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक मनीष वर्मा ने बताया कि रुद्रपुर में दो प्लाट बचे हैं। बरहज में मिनी इंडस्टि्रयल एरिया की पूरी जमीन कांशीराम आवास के नाम कर दी गई है।