देवरिया। मेरे नंबर से बुकिंग नहीं हो रही है। मेरे नंबर पर ओटीपी नहीं आ रही है। मेरा कनेक्शन नंबर नहीं मिल रहा है। गैस एजेंसी कार्यालयों पर इस तरह की शिकायतें सर्वाधिक हैं। इसे लेकर हर दिन आरोप-प्रत्यारोप और हंगामा भी हो रहा है।
दरअसल लोग एक दशक में रसोई गैस की प्रचुरता के चलते बुकिंग ही भूल गए थे। अब जब बुकिंग कराना पड़ रहा है तो तमाम दिक्कतें आ रही हैं। जिले में 781149 घरेलू और 1856 काॅमर्शियल कनेक्शन हैं।
उमा नगर निवासी अमित सिंह बताते हैं कि घरेलू कनेक्शन वालों को वर्ष 2015 के बाद सिलिंडर के लिए लाइन में लगने की समस्या से छुटकारा मिल गया था। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी गैस सिलिंडरों की इतनी प्रचुरता थी कि कभी-कभी दिन में दो बार होम डिलीवरी की गाड़ी मोहल्ले में घूम जाती थी। घर तक गैस पहुंचाने वाले हॉकर इस उम्मीद में हालचाल लेते थे कि हमारे यहां सिलिंडर पहुंचाएंगे तो 20 रुपये अधिक मिलेगा।
हम खुद गाड़ी तक जाएंगे तो वह भी नहीं देना पड़ेगा। हॉकर को नाम पता याद रहता था। वह अपने रजिस्टर में नाम-पता नोट करके ले जाता था। अब अचानक से बुकिंग के नियम सख्ती से लागू हुए तो पासबुक खोजना पड़ा है।
साकेत नगर मोहल्ला निवासी अखिलेश्वर तिवारी और सोनदा निवासी धर्मेंद्र ने बताया कि शुरूआत में जब सिलिंडरों के रेट बढ़े और बदले में सब्सिडी खाते में आई तो करीब एक साल तक सबने अपने मोबाइल नंबर अपडेट रखे।