देवरिया। बस्ती जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात दरोगा अजय कुमार गौड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के छोटे भाई व झांसी में तैनात एडीएम अरुण कुमार गौड़ ने मामले में हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब जांच उन्हीं लोगों के हाथ में होगी जिन पर संदेह है, तो न्याय कैसे मिलेगा।
बुधवार को अपने घर पर लोगों से इस घटना को लेकर चर्चा के दौरान अरुण ने कहा कि थाने में भोजन बनाने वाले फॉलोवर ने पिछले दो दिनों में तीन बार अपना बयान बदला, जिससे उस पर ही संदेह गहरा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने प्रभारी एसओ को खोजने में भी लापरवाही बरती गई, जो सबसे बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है। घटना से एक दिन पहले एसओ छुट्टी पर गए और अजय भैया को चार्ज दिया गया। प्रभारी एसओ का मोबाइल बंद होने पर भी किसी ने खोजबीन करना जरूरी नहीं समझा। वरिष्ठ अफसर भी चुप रहे, जो आश्चर्यजनक है। पुलिस महकमे में जहां हर वक्त सभी को एक्टिव रहना जरूरी है, वहां एक जिम्मेदार पद पर तैनात व्यक्ति के बारे में कोई खोजबीन नहीं हो रही है तो शंका होना लाजमी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते वहां की पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद सच्चाई जल्द सामने आ जाती और हो सकता है कि अजय भैया को सकुशल खोज लिया जाता।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अधिक निष्पक्ष जांच जरूरी
अरुण ने कहा कि अभी उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अधिकृत प्रति नहीं मिली है। इसलिए रिपोर्ट में क्या है इसकी विधिवत जानकारी भी नहीं है। हम विसरा जांच कराएंगे। हमारी शुरू से ही मांग है कि मामले की जांच किसी वरिष्ठ अफसर को दी जाए, लेकिन न जाने क्यों पुलिस अफसर पूरे मामले में टाल मटोल कर रहे हैं। घटना के दिन से ही पुलिस अफसरों का रवैया उचित नहीं है। यह पुलिस महकमे की साख पर भी सवाल है। कायदे से तो यह होना चाहिए था कि परशुराम के एसओ और सीओ को हटाकर किसी दूसरे को वहां का चार्ज दिया जाता। इसके बाद किसी वरिष्ठ अफसर से जांच कराई जाती, लेकिन ऐसा लगता है कि वरिष्ठ अफसर ही इस पूरे मामले में कुछ छिपाना चाहते हैं। जो संदिग्ध हैं, वे ही थाने पर तैनात हैं और वे ही जांच भी कर रहे हैं तो क्या होगा?
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सीएम से करूंगा शिकायत
अरुण गौड़ ने कहा कि हमारे पूरे परिवार के बारे में लोग जानते हैं। बस्ती पुलिस ने अगर निष्पक्ष जांच नहीं की तो मामले को लेकर लखनऊ जाऊंगा। मैं और मेरी पत्नी भी प्रशासनिक पद पर हैं और नियमों की जानकारी रखते हैं। अफसर नहीं सुनेंगे तो मुख्यमंत्री तक जाऊंगा, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच जरूर होगी।